लंदन | भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लंदन में आयोजित आध्यात्मिक एवं राष्ट्रभक्ति कार्यक्रमों में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज और गुजरात के सूरत स्थित अटल अखाड़ा के सचिव श्री महंत बटुक गिरी बापू जी महाराज ने सहभागिता की। कार्यक्रमों के दौरान प्रवासी भारतीयों को राष्ट्रभक्ति, मातृभूमि के प्रति सम्मान, भारतीय संस्कृति और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया गया।
दोनों संत लंदन में आयोजित संत संसद में भी एक साथ उपस्थित रहे। संत संसद का आयोजन Network 10 के मुख्य संपादक श्री संजय गिरी जी द्वारा किया गया, जिसमें संतों, धर्माचार्यों और प्रवासी भारतीय समाज की सहभागिता रही।
इसके अलावा लंदन स्थित सिद्ध आश्रम में श्री राज राजेश्वर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में भी दोनों संत शामिल हुए। यहां राष्ट्र, सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
🎯 ‘तिरंगा भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक’
जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, त्याग, बलिदान, संविधान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तिरंगे का सम्मान भारत के सम्मान के समान है।
उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपनी मातृभूमि और भारतीय संस्कृति से भावनात्मक संबंध बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी देश में रहें, भारत के प्रति प्रेम और सम्मान सदैव हृदय में जीवित रहना चाहिए।
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने यह भी कहा कि राष्ट्रभक्ति का अर्थ किसी दूसरे देश से घृणा करना नहीं है। भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना में विश्वास करती है। इसलिए विदेशों में रहने वाले भारतीयों को वहां के कानून और संविधान का सम्मान करते हुए अपने आचरण, सेवा और ईमानदारी से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपनी आने वाली पीढ़ियों को भारत के इतिहास, संस्कृति, सनातन संस्कार और राष्ट्र के गौरव से जोड़ने का आह्वान किया।
🎯 महंत बटुक गिरी बापू ने दिया संस्कृति और मातृभूमि का संदेश
अटल अखाड़ा के सचिव श्री महंत बटुक गिरी बापू जी महाराज ने कहा कि भारतीय जिस देश में रहते हैं, वहां के कानून और संविधान का सम्मान करते हुए ईमानदारी, सेवा और समर्पण के साथ जीवन जीना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्मभूमि के प्रति निष्ठा भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन जन्मभूमि भारत के प्रति प्रेम और सम्मान को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपनी संतानों को भारतीय संस्कृति, सनातन संस्कार और राष्ट्र के गौरव से जोड़ने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहकर अपने अच्छे आचरण से भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया जा सकता है।
🎯 वंदे मातरम् और राष्ट्रगान से गूंजा लंदन
स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान का सामूहिक गायन हुआ। इस दौरान ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के जयघोष से कार्यक्रम स्थल राष्ट्रभक्ति के माहौल से गूंज उठा।
भारत की सुख-समृद्धि, अखंडता, शांति और विश्व कल्याण की कामना के लिए हवन-यज्ञ भी किया गया।
🎯 सिद्ध आश्रम में शहीदों को किया नमन
लंदन स्थित सिद्ध आश्रम में श्री राज राजेश्वर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में संतों और श्रद्धालुओं ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को नमन किया।
कार्यक्रम में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष के साथ देश की अखंडता, समृद्धि, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की गई।
🙏🏻 लंदन से दिया विश्वबंधुत्व का संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की संस्कृति, भावना, संस्कार और मातृभूमि है।
विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने कर्मक्षेत्र के कानूनों और संविधान का सम्मान करते हुए भारत के साथ अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों को भी जीवित रख सकते हैं।
“तिरंगा हमारी आन है,
तिरंगा हमारी बान है,
तिरंगा हमारी शान है।”
भारत माता की जय!
वंदे मातरम्!
जय हिंद!
वसुधैव कुटुम्बकम्!
