नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों की अयोग्यता को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। TMC महासचिव और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की है।
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू होने के बावजूद मामले में फैसला लेने में देरी हो रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस देरी के मामले में हस्तक्षेप करने और लोकसभा अध्यक्ष को जल्द निर्णय लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
🎯 क्या है पूरा मामला?
TMC के मुताबिक, उसके 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतने के बाद नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की है।
TMC का दावा है कि सांसदों का किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में जाना दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है। इसी आधार पर पार्टी ने इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं।
बाद में अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से इन मामलों का जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया।
🎯 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 25 अगस्त 2026 को सुनवाई निर्धारित है।
मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी।
इस सुनवाई पर इसलिए भी नजर है क्योंकि यह मामला संसद में दलबदल विरोधी कानून के तहत सांसदों की अयोग्यता और ऐसे मामलों में निर्णय लेने में होने वाली देरी से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।
🎯 शिवसेना के सांसदों का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में
इसी तरह का एक अन्य मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है। इसमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मंजूरी दिए जाने को चुनौती दी गई है।
उस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ कर रही है।
🎯 अब क्या होगा?
अब सबकी नजर 25 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत यह देखेगी कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित अयोग्यता की कार्यवाही में कथित देरी के संबंध में क्या निर्देश दिए जाने चाहिए।
फिलहाल, 20 TMC सांसदों की सदस्यता पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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