अमेरिका से भारतीय छात्रों का मोहभंग? दाखिलों में 15% की गिरावट, वीजा नीति बनी बड़ी वजह

विदेश

नई दिल्ली। अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए हालात लगातार चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के दाखिलों में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आवेदन और दाखिलों में कमी के पीछे कड़े वीजा नियम, इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव और पढ़ाई के बाद काम करने के अवसरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता अहम कारण माने जा रहे हैं।

🎯 भारतीय छात्रों के आवेदन में बड़ी गिरावट

‘कॉमन ऐप’ की रिपोर्ट के अनुसार, 1,100 से अधिक अमेरिकी संस्थानों को शामिल करने वाले प्लेटफॉर्म पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आवेदन में भी गिरावट दर्ज की गई है। 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय आवेदनों की संख्या में करीब 10 प्रतिशत की कमी बताई गई है।

भारत अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोतों में शामिल है। 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए अमेरिका पहुंचे थे।

🎯 वीजा नियमों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी प्रशासन की बदलती इमिग्रेशन नीतियों को छात्रों की चिंता की बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि से जुड़े नियमों में बदलाव और पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्पों को लेकर अनिश्चितता ने अमेरिका को लेकर छात्रों के फैसले को प्रभावित किया है।

इसके अलावा, OPT यानी Optional Practical Training कार्यक्रम से जुड़े संभावित भारी शुल्क की खबरों ने भी भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ाई है।

🎯 सिर्फ छात्रों पर नहीं, अमेरिका पर भी असर

अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में कमी का असर अमेरिकी विश्वविद्यालयों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था में करीब 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया था। 2026-27 में यह योगदान घटकर लगभग 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान जताया गया है।

🎯 ब्रिटेन और यूरोप बन रहे विकल्प

अमेरिका में वीजा और इमिग्रेशन नियमों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारतीय छात्र अब ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप के दूसरे देशों को भी विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिका की सख्त वीजा नीति और पढ़ाई के बाद रोजगार को लेकर अनिश्चितता आने वाले समय में भारतीय छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों से और दूर कर देगी?

फिलहाल आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की दिलचस्पी पर असर पड़ना शुरू हो गया है।

 

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