नई दिल्ली। भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना अब जमीन पर तेजी से आकार ले रही है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के महाराष्ट्र वाले हिस्से में बड़े पैमाने पर एलिवेटेड ट्रैक, वायाडक्ट, पुल, स्टेशन और सुरंगों का निर्माण चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 25 अगस्त को ठाणे और पालघर में चल रहे निर्माण कार्य की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। ताजा जानकारी के मुताबिक 100 किलोमीटर से ज्यादा हिस्से में पियर निर्माण आगे बढ़ चुका है और करीब 74 किलोमीटर के पियर वायाडक्ट गर्डर लगाने के लिए तैयार हैं।
🎯 135 किलोमीटर से ज्यादा लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर
महाराष्ट्र में शिलफाटा, ठाणे से जरोली गांव, महाराष्ट्र-गुजरात सीमा तक करीब 135.45 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया जा रहा है। इसमें लगभग 124.027 किलोमीटर हिस्सा वायाडक्ट और पुलों का है।
इस सेक्शन में ठाणे, विरार और बोइसर में तीन एलिवेटेड बुलेट ट्रेन स्टेशन बनाए जा रहे हैं।
🎯 ठाणे स्टेशन में पर्यावरण का भी ध्यान
ठाणे स्टेशन को पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। स्टेशन का कॉनकोर्स जमीन के प्राकृतिक स्तर से करीब 12 मीटर ऊपर बनाया जा रहा है, ताकि इलाके के मैंग्रोव क्षेत्र पर निर्माण का प्रभाव कम किया जा सके।
🎯 74 किलोमीटर के पियर तैयार
बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड ट्रैक के लिए पिलर यानी पियर निर्माण इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महाराष्ट्र के संबंधित हिस्से में 100 किलोमीटर से ज्यादा लंबाई में पियर निर्माण का काम चल रहा है, जबकि लगभग 74 किलोमीटर में पियर तैयार हो चुके हैं। अब इन स्थानों पर वायाडक्ट गर्डर लगाए जा रहे हैं।
निर्माण की रफ्तार बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में:
- 9 कास्टिंग यार्ड
- 7 फुल-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री
- 8 स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग गैंट्री काम कर रही हैं।
🎯 पहाड़ों में बन रहीं सुरंगें
इस परियोजना के महाराष्ट्र सेक्शन में पर्वतीय इलाकों से गुजरने के कारण सुरंग निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण है।
ताजा अपडेट के मुताबिक 7 पर्वतीय सुरंगों में 3 का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है। ब्रेकथ्रू का मतलब है कि सुरंग की खुदाई दोनों तरफ से करते हुए दोनों हिस्सों को आपस में जोड़ दिया गया है।
इन तीन सुरंगों में ब्रेकथ्रू 2026 के शुरुआती महीनों में पूरा हुआ था। सरकारी जानकारी के मुताबिक तीसरी सुरंग MT-07 पालघर के दहानू तालुका में अंबेसरी गांव के पास है। इसकी लंबाई करीब 417 मीटर है और इसे डबल ट्रैक के लिए बनाया गया है।
सुरंग निर्माण में ड्रिलिंग और नियंत्रित ब्लास्टिंग के साथ आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। सुरंग की स्थिरता और आसपास के क्षेत्र पर प्रभाव की निगरानी के लिए सेंसर और अन्य तकनीक इस्तेमाल की गई।
🎯 तीन बड़ी सुरंगों में ब्रेकथ्रू
महाराष्ट्र में:
- पहली सुरंग MT-05 का ब्रेकथ्रू 2 जनवरी 2026 को हुआ था। इसकी लंबाई करीब 1.5 किलोमीटर है।
- दूसरी सुरंग MT-06 का ब्रेकथ्रू 3 फरवरी 2026 को हुआ। इसकी लंबाई करीब 454 मीटर है।
- तीसरी सुरंग MT-07 का ब्रेकथ्रू 2 जून 2026 को पूरा हुआ। इसकी लंबाई करीब 417 मीटर है।
यानी लगभग पांच महीने के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का ब्रेकथ्रू पूरा किया गया।
🎯 नदियों के ऊपर बनेंगे बड़े पुल
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कई बड़ी नदियों को पार करने के लिए विशेष पुल बनाए जा रहे हैं।
इनमें:
- उल्हास नदी — 460 मीटर
- वैतरणा नदी — 2.32 किलोमीटर
- जगानी नदी — 510 मीटर
लंबे पुल शामिल हैं। इसके अलावा इस सेक्शन में कुल 36 पुल और क्रॉसिंग बनाई जा रही हैं, जिनमें 12 स्टील ब्रिज भी शामिल हैं।
ये पुल मौजूदा रेलवे लाइनों, नदियों, मुंबई-नासिक हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों को पार करेंगे।
🎯 जापानी तकनीक के साथ बन रहा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है और इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरा कॉरिडोर करीब 508 किलोमीटर लंबा है और बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।
परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय मौजूदा रेल यात्रा की तुलना में काफी कम होने की उम्मीद है।
🎯 क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
यह परियोजना केवल तेज ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए भारत में हाई-स्पीड रेल के लिए नई इंजीनियरिंग क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसमें बड़े पैमाने पर:
- एलिवेटेड ट्रैक
- आधुनिक स्टेशन
- पर्वतीय सुरंगें
- नदी पुल
- स्टील ब्रिज
- अत्याधुनिक लॉन्चिंग सिस्टम
- हाई-स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
फिलहाल ठाणे और पालघर में निर्माण की रफ्तार तेज है और पियर, वायाडक्ट, पुल तथा सुरंगों पर एक साथ काम आगे बढ़ रहा है। ताजा अपडेट इस बात का संकेत है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बन चुकी है।
