दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर मामले में कोर्ट ने फैसला टाला; CBI ने कहा- जांच अभी लंबित, आरोपित के खिलाफ साक्ष्य मौजूद
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में पूर्व दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर मंगलवार को अदालत ने फैसला टाल दिया। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह अब 3 सितंबर 2026 को जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुनाएंगे।
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन अदालत में मौजूद रहे। मामले में जमानत को लेकर बचाव पक्ष और CBI के बीच विस्तृत बहस हुई। CBI ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच अभी लंबित है और सत्येंद्र जैन ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
🎯 बचाव पक्ष ने कहा- गिरफ्तारी में हुई देरी
सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और अधिवक्ता विवेक जैन ने जमानत के पक्ष में दलीलें पेश कीं।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि इस मामले में FIR मई 2024 में दर्ज की गई थी, जबकि सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी करीब 27 महीने बाद हुई। वकीलों का तर्क था कि इतनी लंबी अवधि तक जांच चलने के दौरान सत्येंद्र जैन जांच में सहयोग करते रहे, ऐसे में उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामला सरकार के नीति संबंधी निर्णयों से जुड़ा है और अदालतों को नीति निर्माण के क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
वकीलों के मुताबिक सत्येंद्र जैन के फरार होने की कोई आशंका नहीं है। अदालत यदि आवश्यक समझे तो जमानत के साथ उचित शर्तें लगाकर उनकी मौजूदगी सुनिश्चित कर सकती है।
🎯 STP की क्षमता बढ़ाने के फैसले पर भी दी दलील
बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने का निर्णय तकनीकी समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया था।
दलील के मुताबिक STP की क्षमता को 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने का फैसला तकनीकी समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया था, जबकि उसकी अधिकतम क्षमता 30 MGD बताई गई।
बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मामले की FIR एसीबी ने ED से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज की थी।
वकीलों ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले का हवाला देते हुए कहा कि उसमें सत्येंद्र जैन से संबंधित अपराध की आय का कोई संबंध सामने नहीं आया था और उस मामले में किसी आरोपित की गिरफ्तारी भी नहीं की गई थी।
🎯 CBI ने जमानत देने का किया विरोध
दूसरी ओर, CBI की ओर से लोक अभियोजक मनीष रावत ने जमानत याचिका का विरोध किया।
CBI ने अदालत में तर्क दिया कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई पहलुओं की जांच बाकी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सत्येंद्र जैन ने जांच में सहयोग नहीं किया और उनके खिलाफ साक्ष्य मौजूद हैं।
CBI का कहना था कि जब जांच अभी लंबित है, ऐसे समय में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत से जमानत याचिका खारिज करने का आग्रह किया।
🎯 बचाव पक्ष ने CBI की दलील पर उठाए सवाल
CBI की ओर से जांच को शुरुआती चरण में बताए जाने पर बचाव पक्ष ने आपत्ति जताई।
सत्येंद्र जैन के वकीलों ने कहा कि मामले की जांच मई 2024 से चल रही है, इसलिए इसे शुरुआती चरण की जांच नहीं कहा जा सकता।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि CBI जिन दस्तावेजों और तथ्यों का हवाला दे रही है, उनमें से कई दस्तावेज ED से प्राप्त हुए हैं।
अब अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर 3 सितंबर को जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी।
🎯 छह आरोपित गिरफ्तार
इस मामले में सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। अदालत के अनुसार सभी आरोपित फिलहाल 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में हैं।
मंगलवार की सुनवाई के दौरान अन्य आरोपितों में पंकज वर्मा, उदित प्रकाश राय और राज कुमार कुर्रा भी अदालत में मौजूद रहे।
🎯 उदित प्रकाश राय को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति
मामले के एक अन्य आरोपित उदित प्रकाश राय ने स्वास्थ्य संबंधी समस्या का हवाला देते हुए अदालत से अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी।
उन्होंने बंद जगह में घबराहट होने की शिकायत भी की।
अदालत ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया और उन्हें 3 सितंबर की सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दे दी।
🎯 अब 3 सितंबर को होगा फैसला
सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मंगलवार को फैसला सुरक्षित रखते हुए निर्णय की तारीख 3 सितंबर तय की।
अब सभी की नजरें 3 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर रहेंगी। उसी दिन विशेष अदालत यह तय करेगी कि दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन को जमानत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे जारी रहती है।
महत्वपूर्ण: यह खबर उपलब्ध अदालती कार्यवाही और संबंधित रिपोर्ट में दिए गए पक्षों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही माना जाएगा।
