महाराष्ट्र देश का करीब 60% प्याज पैदा करता है, नासिक की मंडियों से देशभर में पहुंचता है प्याज; आवक, भंडारण, कारोबारियों का नेटवर्क और मांग-आपूर्ति का सीधा असर कीमतों पर
नई दिल्ली। प्याज की कीमतों में तेजी एक बार फिर आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ने लगी है। दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्याज के दाम बढ़ने के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हर साल प्याज की कीमतों में इतनी तेजी क्यों आती है? इसके पीछे सिर्फ उत्पादन कम होना ही कारण नहीं है, बल्कि मंडी में आवक, भंडारण, थोक कारोबारियों का नेटवर्क, सप्लाई चेन और बाजार में प्याज की उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
प्याज के राष्ट्रीय बाजार में नासिक और आसपास की मंडियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र देश के कुल प्याज उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है और महाराष्ट्र के उत्पादन में नासिक की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत बताई गई है।
🎯 नासिक की मंडियों से क्यों तय होती है प्याज की कीमत?
नासिक में प्याज की करीब 27 बड़ी मंडियां हैं। इनमें लासलगांव देश की प्रमुख प्याज मंडियों में शामिल है।
इसके अलावा पिंपलगांव बसवंत, चांदवड़, देवला, येवला, निफाड़, मनमाड और उमराणे जैसे बाजार भी प्याज के बड़े कारोबार के केंद्र हैं।
इन मंडियों में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं, जहां एजेंट और थोक कारोबारी प्याज खरीदते हैं। इसके बाद यही प्याज देश के अलग-अलग राज्यों के बाजारों तक पहुंचता है।
नासिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वेयरहाउस और भंडारण सुविधाएं भी मौजूद हैं। प्याज की छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के बाद उसे कुछ समय तक स्टोर किया जा सकता है।
यही कारण है कि नासिक की मंडियों में प्याज की आवक और कीमतों में होने वाला बदलाव देश के कई दूसरे बाजारों में भी दिखाई देने लगता है।
🎯 दिल्ली से ज्यादा नासिक में पहुंच गया था भाव
प्याज की मौजूदा तेजी को देखें तो सोमवार को दिल्ली की मंडियों में प्याज करीब 25 रुपये प्रति किलो के आसपास था, जबकि नासिक में भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो और मुंबई में करीब 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।
हालांकि सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद मंगलवार को नासिक की मंडियों में प्याज की आवक बढ़ने लगी और कीमतों में नरमी का रुख दिखाई दिया।
इससे साफ है कि मंडियों में प्याज की उपलब्धता और आवक कीमतों पर तत्काल असर डाल सकती है।
🎯 क्या प्याज की कमी ही बढ़ाती है कीमत?
हर बार प्याज महंगा होने का मतलब यह नहीं होता कि देश में प्याज की कुल उपलब्धता खत्म हो गई है।
मांग और उपलब्धता के बीच अंतर, मंडियों में रोजाना आने वाली मात्रा, कारोबारियों की खरीद और भंडारण जैसे कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
यदि बड़ी मात्रा में प्याज बाजार में आने के बजाय स्टोर कर लिया जाता है, तो तत्काल बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा कम हो सकती है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार ने जुलाई में भी संकेत दिया था कि नासिक क्षेत्र में कारोबारियों के एक वर्ग द्वारा बड़ी मात्रा में खरीद किए जाने से बाजार पर असर पड़ सकता है।
🎯 नासिक का भाव बढ़ते ही दूसरे राज्यों पर असर
नासिक से प्याज देश के कई बड़े बाजारों तक पहुंचता है। इसमें दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, असम और दक्षिण भारत के कई बाजार शामिल हैं।
ऐसे में नासिक की थोक कीमत में बदलाव का असर दूसरे राज्यों के थोक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
थोक कीमत बढ़ने के बाद परिवहन, भंडारण और खुदरा कारोबार की लागत जुड़ती है और अंततः इसका असर उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है।
🎯 मुंबई बंदरगाह से निर्यात में भी आसानी
नासिक की एक और बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है। मुंबई बंदरगाह नजदीक होने के कारण यहां से प्याज को देश के बाहर भेजने में भी सुविधा रहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के कारोबारी भी नासिक के नेटवर्क और भंडारण सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं।
यानी नासिक केवल उत्पादन का केंद्र नहीं बल्कि प्याज की खरीद, भंडारण, ग्रेडिंग, पैकिंग, वितरण और निर्यात से जुड़ा बड़ा व्यापारिक केंद्र है।
🎯 सरकार के बफर स्टॉक की खरीद भी नासिक से
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार बफर स्टॉक भी तैयार करती है।
2023 में NAFED और NCCF ने महाराष्ट्र से करीब 3 लाख टन ग्रीष्मकालीन प्याज खरीदा था। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें करीब 90 प्रतिशत खरीद नासिक जिले से हुई थी।
इस बार बाजार में तेजी आने पर सरकार इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कर रही है।
यानी जिस क्षेत्र की मंडियों में कीमतों में तेजी दिखाई दे रही है, वहीं से सरकारी बफर स्टॉक निकालकर दूसरे शहरों में प्याज भेजा जा रहा है।
🎯 दिल्ली में ₹35 किलो प्याज बेचने की तैयारी
बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने दिल्ली में रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए करीब 800 टन प्याज बुधवार को दिल्ली पहुंचाया जाएगा।
इस प्याज को 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर बेचने की योजना है।
सरकारी व्यवस्था के तहत NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार की दुकानों के माध्यम से इसकी खुदरा बिक्री की जाएगी।
🎯 दूसरे शहरों में भी भेजा जा रहा प्याज
सरकार केवल दिल्ली में ही कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं कर रही है। रेलवे रैक के माध्यम से प्याज को चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी जैसे शहरों तक भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसका उद्देश्य सरकारी बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
🎯 आगे क्या होगा?
प्याज की कीमतों में राहत काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में मंडियों में कितनी मात्रा में प्याज पहुंचता है और बाजार में उपलब्ध स्टॉक कितना रहता है।
अगर आवक लगातार बढ़ती है और सरकारी बफर स्टॉक भी बाजार में आता रहता है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
लेकिन यदि मंडियों में आवक फिर कम होती है या बड़ी मात्रा में प्याज बाजार से बाहर स्टोर किया जाता है, तो कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।
🎯 निष्कर्ष
प्याज की कीमतों का खेल केवल खेत से बाजार तक का नहीं है। इसके पीछे उत्पादन, मंडी की आवक, थोक कारोबार, भंडारण, सप्लाई चेन, मांग-आपूर्ति और सरकारी हस्तक्षेप जैसे कई कारक काम करते हैं।
नासिक इस पूरी सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र होने के कारण वहां की मंडियों में होने वाला बदलाव देश के दूसरे हिस्सों के बाजारों को भी प्रभावित करता है। फिलहाल सरकार बफर स्टॉक के जरिए प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है।
