GDP के बाद GST ने भी दिखाया दम, अगस्त में 14.8% बढ़ा कलेक्शन; ₹2 लाख करोड़ के करीब पहुंचा आंकड़ा

कारोबार

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने के बाद अब अगस्त महीने के GST कलेक्शन के आंकड़ों ने भी सरकार के लिए राहत की खबर दी है। अगस्त 2026 में देश का ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़कर करीब ₹2 लाख करोड़ पहुंच गया।

GST राजस्व में यह बढ़ोतरी घरेलू कारोबार और आयात, दोनों से मिलने वाले टैक्स में वृद्धि के कारण हुई है। हालांकि, इस दौरान GST रिफंड में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई, जिसके चलते नेट GST कलेक्शन ग्रॉस कलेक्शन की तुलना में कम रहा।

अगस्त में कितना रहा GST कलेक्शन?

अगस्त महीने में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन करीब ₹2 लाख करोड़ रहा। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इसमें 14.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में घरेलू लेन-देन से प्राप्त GST राजस्व 9.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1.37 लाख करोड़ से अधिक रहा। वहीं आयात से मिलने वाला GST राजस्व करीब 29 प्रतिशत बढ़कर ₹62,604 करोड़ पहुंच गया।

इससे संकेत मिलता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ आयात से जुड़ी कारोबारी गतिविधियों में भी मजबूती रही।

CGST, SGST और IGST से कितनी हुई कमाई?

अगस्त के दौरान अलग-अलग मदों में GST कलेक्शन इस प्रकार रहा—

  • CGST: ₹38,413 करोड़
  • SGST: ₹46,316 करोड़
  • IGST: ₹1.15 लाख करोड़ से अधिक
  • कुल ग्रॉस GST: करीब ₹2 लाख करोड़

इन आंकड़ों में IGST की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। आयात और अंतरराज्यीय लेन-देन से जुड़े टैक्स में बढ़ोतरी का असर कुल संग्रह पर भी दिखाई दिया।

GST रिफंड में भी 68% की बढ़ोतरी

सरकार की GST आय बढ़ने के साथ ही रिफंड की राशि में भी काफी तेज वृद्धि हुई। अगस्त में GST रिफंड 68 प्रतिशत बढ़कर ₹31,795 करोड़ हो गया।

रिफंड को घटाने के बाद अगस्त का नेट GST कलेक्शन ₹1.68 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है।

यानी ग्रॉस कलेक्शन में 14.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन रिफंड में बड़ी बढ़ोतरी के कारण नेट कलेक्शन की सालाना वृद्धि 8.3 प्रतिशत रही।

GDP के मजबूत आंकड़ों के बाद GST ने बढ़ाई उम्मीद

GST कलेक्शन में तेजी ऐसे समय आई है जब भारत की GDP से जुड़े ताजा आंकड़ों में भी मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।

GDP और GST दोनों के आंकड़ों को साथ देखा जाए तो घरेलू आर्थिक गतिविधियों, खपत और कारोबार में मजबूती के संकेत मिलते हैं। हालांकि, GST कलेक्शन अकेले अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि इसमें टैक्स दरों, आयात और रिफंड जैसे कई कारकों का भी प्रभाव रहता है।

किन गतिविधियों से बढ़ी GST आय?

अगस्त के आंकड़ों में घरेलू लेन-देन से मिलने वाले GST में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मतलब है कि देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं से जुड़े कारोबार से सरकार को पहले की तुलना में ज्यादा GST प्राप्त हुआ।

दूसरी तरफ आयात से मिलने वाले GST में 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आयात से जुड़े कलेक्शन में इतनी तेज वृद्धि ने कुल GST राजस्व को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सितंबर में GST काउंसिल की अहम बैठक

GST से जुड़े अगले बड़े फैसलों पर भी नजर बनी हुई है। GST काउंसिल की 57वीं बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में सुबह 11 बजे आयोजित होने की जानकारी दी गई है।

इस बैठक में GST व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में अगस्त के मजबूत GST कलेक्शन के बाद सितंबर की बैठक भी कारोबार और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या कहते हैं अगस्त के आंकड़े?

अगस्त का GST डेटा मोटे तौर पर तीन महत्वपूर्ण संकेत देता है—

पहला, कुल GST कलेक्शन में सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई।

दूसरा, घरेलू कारोबार से मिलने वाला GST 9.3 प्रतिशत बढ़ा, जो घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देता है।

तीसरा, आयात से मिलने वाले GST में 29 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई, जिसने कुल कलेक्शन को मजबूत किया।

हालांकि, GST रिफंड में 68 प्रतिशत की वृद्धि को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रिफंड के बाद सरकार का नेट GST कलेक्शन ₹1.68 लाख करोड़ रहा।

कुल मिलाकर, GDP में 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ और अगस्त में GST कलेक्शन के करीब ₹2 लाख करोड़ पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। अब आने वाले महीनों के आंकड़े यह बताएंगे कि यह मजबूती कितनी टिकाऊ रहती है।

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