नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में आकर्षक मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 20.72 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच करते हुए निजी बैंक के डिप्टी मैनेजर समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों में आरिफ हुसैन मंसूरी, कन्हैया दास और राहुल टेलर शामिल हैं। जांच में आरोप है कि बैंक में कार्यरत डिप्टी मैनेजर ने साइबर ठगों को बैंक खातों की सुविधा उपलब्ध कराई और इसके बदले कमीशन लिया। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
शेयर बाजार में निवेश का दिया था झांसा
मामला एक ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर बड़ा मुनाफा कमाने का भरोसा दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित नितिन अरोड़ा की शिकायत के आधार पर साइबर थाने में पिछले वर्ष फरवरी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने ठगी की रकम के लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ठगी की रकम के एक बैंक खाते में पहुंचने और बाद में चेक के माध्यम से निकाले जाने की जानकारी मिली।
बैंक खाते के जरिए घुमाई गई ठगी की रकम
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा गया। इसके बाद रकम को निकालने और ट्रांसफर करने का काम किया गया।
तकनीकी निगरानी और मैनुअल सत्यापन के जरिए पुलिस राजस्थान के उदयपुर तक पहुंची। जांच के दौरान मावली, उदयपुर में आरोपितों की पहचान की गई।
कन्हैया और राहुल पहले गिरफ्तार
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए कन्हैया दास और राहुल टेलर को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि कन्हैया दास ने साइबर ठगी से जुड़ी रकम हासिल करने के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। वहीं राहुल टेलर पर नकदी निकालने और रकम को आगे ट्रांसफर करने में भूमिका निभाने का आरोप है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों आरोपित इस नेटवर्क से कब से जुड़े थे और उनके बैंक खातों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
डिप्टी मैनेजर की भूमिका भी सामने आई
जांच के दौरान पुलिस को बैंकिंग सिस्टम से जुड़े एक अन्य व्यक्ति की भूमिका के बारे में जानकारी मिली। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरिफ हुसैन मंसूरी को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरिफ हुसैन मंसूरी एक निजी बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर काम कर रहा था और अप्रैल 2024 से संबंधित बैंक में कार्यरत था।
आरोप है कि उसने दो प्रतिशत कमीशन के बदले साइबर ठगों को बैंक खातों की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद की।
चार मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने तीनों आरोपितों के पास से साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने वाले चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के जरिए पुलिस कथित साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।
तीनों आरोपी उदयपुर के रहने वाले
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपित मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले हैं। दिल्ली में दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच करते हुए पुलिस राजस्थान तक पहुंची और वहां कार्रवाई की।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपितों ने इससे पहले भी इसी तरह के साइबर अपराधों को अंजाम दिया था या नहीं।
पुलिस खंगाल रही है लेनदेन का पूरा नेटवर्क
20.72 लाख रुपये की ठगी के इस मामले में पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि पीड़ित से रकम हासिल करने के बाद उसे किन-किन खातों में भेजा गया और किस स्तर पर नकदी निकाली गई।
साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बैंक कर्मचारी की कथित भूमिका केवल एक खाते तक सीमित थी या वह किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क के लिए कई बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करा रहा था।
शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी से रहें सावधान
इस मामले से एक बार फिर साफ होता है कि शेयर बाजार में गारंटीड या बेहद कम समय में असामान्य मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं से सावधान रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति या ऑनलाइन ग्रुप के कहने पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने से पहले निवेश प्लेटफॉर्म और संबंधित व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए।
पुलिस की जांच अभी जारी है और गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
