नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा जिले में पुलिस ने 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट एवं प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। शाहदरा जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी मार्कशीट, लैपटॉप, प्रिंटर और दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को सूचना मिली थी कि शाहदरा निवासी नवनीत त्यागी फर्जी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा प्रमाणपत्र तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहा है। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर आरोपी से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कराया।
पुलिस कर्मचारी ने आरोपी को अपनी फोटो, 10वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड भेजकर 12वीं की फर्जी मार्कशीट तैयार कराने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की निगरानी शुरू कर दी।
मिराज सिनेमा के पास दबोचा गया आरोपी
17 जुलाई 2026 को इंस्पेक्टर आशीष कुमार के नेतृत्व में स्पेशल स्टाफ की टीम ने जीटी रोड स्थित मिराज सिनेमा, विकास मॉल के पास छापेमारी कर नवनीत त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 10वीं और 12वीं की दो फर्जी मार्कशीट बरामद हुईं। इसके बाद थाना शाहदरा में एफआईआर संख्या 161/2026 दर्ज की गई।
पूछताछ में सामने आए दो और आरोपी
नवनीत त्यागी से पूछताछ के दौरान उसके दो सहयोगियों सबब आलम और फरीद अहमद सैफी के नाम सामने आए। पुलिस ने दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से एक लैपटॉप, प्रिंटर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए।
100 से 150 फर्जी दस्तावेज बेचने का खुलासा
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अब तक करीब 100 से 150 फर्जी 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र एवं मार्कशीट तैयार कर बेच चुके हैं। प्रत्येक दस्तावेज के लिए वे 5,000 से 10,000 रुपये तक वसूलते थे।
बंद हो चुके संस्थान के पंजीकरण का दुरुपयोग
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ग्रामीण मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान के समाप्त हो चुके पंजीकरण का दुरुपयोग कर रहे थे। वे बैकडेट में फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी करते थे, ताकि अभ्यर्थियों और संबंधित अधिकारियों को असली दस्तावेज होने का भ्रम हो सके।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही, जिन लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए हैं उनकी पहचान भी की जा रही है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और इसमें शामिल अन्य आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
