स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम इस समय मैदान के साथ-साथ अपनी कोचिंग व्यवस्था में लगातार बदलाव को लेकर भी चर्चा में है। पिछले करीब पांच वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने टीम के हेड कोच पद पर 11 बदलाव किए हैं। बार-बार कोच बदलने का असर टीम की रणनीति, खिलाड़ियों के साथ तालमेल और प्रदर्शन की निरंतरता पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में हार के बाद PCB ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया। टेस्ट टीम के हेड कोच सरफराज अहमद और बॉलिंग कोच उमर गुल को हटा दिया गया। इसके साथ ही टीम के सात खिलाड़ियों को भी वापस भेज दिया गया। यह बदलाव उस समय हुआ है जब इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का तीसरा टेस्ट 9 सितंबर से खेला जाना है।
मिस्बाह के बाद शुरू हुआ कोच बदलने का सिलसिला
पाकिस्तान क्रिकेट में मौजूदा अस्थिरता का सिलसिला सितंबर 2021 में मिस्बाह उल हक के पद छोड़ने के बाद तेज हुआ। इसके बाद PCB ने लगातार अलग-अलग कोच और अंतरिम कोच नियुक्त किए।
मिस्बाह के बाद सकलैन मुश्ताक ने टीम की जिम्मेदारी संभाली और करीब 12 महीने तक इस पद पर रहे। उनके बाद अब्दुल रहमान को अफगानिस्तान के खिलाफ एक सीरीज के लिए अंतरिम कोच बनाया गया।
मई 2023 में ग्रांट ब्रैडबर्न को तीन साल के अनुबंध पर हेड कोच नियुक्त किया गया। हालांकि, उनका कार्यकाल भी लंबे समय तक नहीं चल सका और बाद में उन्होंने पद छोड़ दिया।
मोहम्मद हफीज से लेकर गिलेस्पी-कस्टर्न तक कई बदलाव
नवंबर 2023 में पूर्व पाकिस्तानी बल्लेबाज मोहम्मद हफीज को टीम की कोचिंग की जिम्मेदारी दी गई। उनका कार्यकाल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरों तक ही सीमित रहा।
इसके बाद अप्रैल 2024 में अजहर महमूद ने अंतरिम हेड कोच के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उस समय PCB स्थायी कोच की तलाश में था।
इसी अवधि में बोर्ड ने जेसन गिलेस्पी और गैरी कर्स्टन को भी नियुक्त किया। गिलेस्पी को टेस्ट टीम की जिम्मेदारी मिली, जबकि कर्स्टन को वनडे और टी20 टीम का कोच बनाया गया।
लेकिन यह व्यवस्था भी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। 2024 टी20 विश्व कप के बाद गैरी कर्स्टन को पद से हटा दिया गया, जबकि दिसंबर 2024 में जेसन गिलेस्पी ने खुद अपना पद छोड़ दिया।
आकिब जावेद का कार्यकाल भी रहा बेहद छोटा
नवंबर 2024 में चयन समिति का हिस्सा रहे आकिब जावेद को हेड कोच की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि, उनका कार्यकाल करीब एक महीने तक ही चला।
इसके बाद मई 2025 में माइक हेसन को पाकिस्तान की सफेद गेंद वाली टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया। अब इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट से वह रेड बॉल टीम की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
जून 2025 में अजहर महमूद की एक बार फिर हेड कोच के तौर पर वापसी हुई। इसके बाद अप्रैल 2026 में सरफराज अहमद को टेस्ट टीम का हेड कोच बनाया गया, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद अब उन्हें भी पद से हटा दिया गया है।
इस तरह सितंबर 2021 में मिस्बाह उल हक के पद छोड़ने के बाद से पाकिस्तान क्रिकेट में कोचिंग पद पर लगातार बदलाव होते रहे हैं।
बीच सीरीज में बदलाव ने बढ़ाई चर्चा
PCB के ताजा फैसले की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि कोचिंग स्टाफ में बदलाव सीरीज के बीच में किया गया है।
इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में हार के बाद सरफराज अहमद और उमर गुल को हटाया गया। इसके साथ ही टीम में भी बड़े बदलाव किए गए। सात खिलाड़ियों को वापस भेजने का फैसला किया गया है।
क्रिकेट टीम में रणनीति और खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाने में कोचिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में बार-बार कोच बदलने से टीम को नई रणनीति और नए सिस्टम के साथ दोबारा तालमेल बैठाना पड़ता है। पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से यही स्थिति लगातार देखने को मिल रही है।
पाकिस्तान ने सात खिलाड़ियों को भेजा वापस
इंग्लैंड के खिलाफ 9 सितंबर से होने वाले तीसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तान ने सात खिलाड़ियों को वापस घर भेजने का फैसला किया है।
इन खिलाड़ियों में विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान, इमाम उल हक और सलमान अली आगा जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं।
यानी एक तरफ कोचिंग स्टाफ में बदलाव हुआ है, तो दूसरी तरफ खिलाड़ियों के समूह में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। ऐसे में तीसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तान की टीम एक बार फिर नई रणनीति और नए संयोजन के साथ मैदान पर उतरेगी।
PCB की रणनीति पर उठ रहे सवाल
पिछले पांच वर्षों में 11 हेड कोच बदलना पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कोचिंग नीति और टीम प्रबंधन में स्थिरता पर सवाल खड़े करता है।
किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम को लंबे समय तक एक रणनीति के तहत तैयार करने के लिए कोचिंग स्टाफ को पर्याप्त समय देना जरूरी माना जाता है। पाकिस्तान में लगातार बदलाव के कारण खिलाड़ियों को भी अलग-अलग कोचों की सोच और रणनीति के मुताबिक खुद को ढालना पड़ा है।
अब देखना होगा कि PCB का ताजा बदलाव पाकिस्तान क्रिकेट को स्थिरता देता है या आने वाले समय में कोचिंग स्टाफ में बदलाव का यह सिलसिला एक बार फिर जारी रहता है।
