नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े चुनावी कार्यों के लिए स्कूल समय के दौरान बैठकों में बुलाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि चुनावी जिम्मेदारी निभाना जरूरी है, लेकिन यदि इसके लिए उन्हें अध्यापन के समय स्कूल से बाहर जाना पड़े तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।
शिक्षकों के मुताबिक, एक ओर उन्हें कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाना होता है और दूसरी ओर चुनावी कार्यों से संबंधित बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
सुबह 11 बजे बैठक का निर्देश
मामले में सीलमपुर के चुनावी पंजीकरण अधिकारी की ओर से जारी एक निर्देश का हवाला दिया गया है। इसमें सभी BLO सुपरवाइजरों को सोमवार सुबह 11 बजे बैठक में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
शिक्षकों के लिए यह समय स्कूल के नियमित शिक्षण कार्य से टकराता है। ऐसे में उन्हें कक्षा छोड़कर बैठक में शामिल होने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
नोटिस में बैठक में अनुपस्थित रहने पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसी चेतावनी के कारण उनके पास बैठक में जाने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचता।
एक शिक्षक के जाने से बढ़ता है दूसरे शिक्षकों पर बोझ
शिक्षकों का कहना है कि चुनावी ड्यूटी के लिए जब कोई शिक्षक स्कूल से बाहर जाता है तो उसकी कक्षाओं को दूसरे शिक्षकों को संभालना पड़ता है। इससे पहले से तय शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है और दूसरे शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है।
इसके अलावा बैठक स्थल तक आने-जाने में लगने वाला समय भी शिक्षकों की ड्यूटी का हिस्सा बन जाता है। इसका असर केवल संबंधित शिक्षक की कक्षाओं पर नहीं, बल्कि स्कूल की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
शिक्षकों को चुनावी कार्य की अहमियत से आपत्ति नहीं
शिक्षकों का कहना है कि वे चुनावी प्रक्रिया के महत्व को समझते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
उनकी मुख्य मांग यह है कि चुनावी बैठकों और अन्य गैर-शिक्षण कार्यों को स्कूल के शिक्षण समय के बाहर रखा जाए, ताकि विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित न हो।
पहले भी दिए गए थे निर्देश
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई में दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से शिक्षकों की BLO ड्यूटी को लेकर निर्देश जारी किए जाने की बात सामने आई थी। इसमें शिक्षकों को यथासंभव छुट्टियों, गैर-शिक्षण घंटों या अवकाश के दिनों में चुनावी ड्यूटी देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया था।
इसके बावजूद स्कूल समय में चुनावी बैठकों के आयोजन से शिक्षकों में नाराजगी है।
दिल्ली हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता
शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी का मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत ने चुनावी कार्य के दौरान शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अदालत की चिंता यह थी कि चुनावी जिम्मेदारियां शिक्षकों के लिए ऐसा ‘असहनीय बोझ’ न बन जाएं जिससे उनकी मूल शैक्षणिक जिम्मेदारियां प्रभावित हों।
अब स्कूल समय में SIR से जुड़ी बैठकों के निर्देशों ने इस पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
शिक्षकों की मांग—स्कूल के बाद हो चुनावी बैठकें
शिक्षकों की मांग है कि SIR और अन्य चुनावी कार्यों से संबंधित बैठकों का समय स्कूल समाप्त होने के बाद निर्धारित किया जाए। इससे चुनावी प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी और बच्चों की पढ़ाई भी नियमित रूप से चलती रहेगी।
फिलहाल मुद्दा इस बात पर केंद्रित है कि चुनावी जिम्मेदारी और बच्चों की पढ़ाई के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिसमें चुनावी कार्य भी समय पर पूरा हो और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई की कीमत पर इसका बोझ न पड़े।
