राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार ने तैयार किया जवाब; कहा- मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम सीधे नहीं लिया, अपमान का इरादा नहीं था
भोपाल। सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश सरकार ने विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से इस संबंध में तैयार जवाब को राज्यपाल मंगूभाई पटेल की मंजूरी भी मिल गई है।
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने फैसले के समर्थन में पांच बिंदुओं वाला जवाब रखने की तैयारी में है। सरकार ने अपने पक्ष में मंत्री के बयान, उसके बाद उनके द्वारा जताए गए खेद और मामले की जांच से जुड़े तथ्यों को आधार बनाया है।
सरकार ने क्या दलील दी?
राज्य सरकार की ओर से तैयार जवाब में कहा गया है कि विजय शाह के विवादित बयान के संबंध में किसी व्यक्ति की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
सरकार की दूसरी प्रमुख दलील यह है कि मंत्री ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था। इसी आधार पर सरकार का कहना है कि बयान को लेकर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में अभियोजन की मंजूरी देना उचित नहीं है।
हालांकि, बयान को लेकर विवाद और उस पर हुई कानूनी कार्रवाई का अंतिम आकलन संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में ही होगा।
सरकार बोली- अपमान करने की मंशा नहीं थी
मध्य प्रदेश सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि विजय शाह की ओर से किसी व्यक्ति या समुदाय को ठेस पहुंचाने अथवा अपमानित करने का इरादा नहीं था।
सरकार के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद मंत्री ने सार्वजनिक रूप से और लिखित रूप से माफी मांगी तथा अपने बयान पर खेद व्यक्त किया।
राज्य सरकार ने यह तर्क भी रखा है कि उक्त बयान के कारण समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने जैसी स्थिति सामने नहीं आई।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने सरकार का पक्ष रखा।
उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT अपनी जांच पूरी कर चुका है।
अब सरकार की ओर से तैयार पांच सूत्रीय जवाब के आधार पर यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी क्यों नहीं दी गई।
विवाद किस बात को लेकर हुआ था?
विजय शाह की ओर से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर विवाद खड़ा हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की अधिकारी हैं और उन्होंने हाल के सैन्य घटनाक्रमों के दौरान आधिकारिक ब्रीफिंग में भी भूमिका निभाई है।
विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह की टिप्पणी पर सवाल उठे और उनसे माफी की मांग की गई। इसके बाद मंत्री ने अपने बयान पर खेद जताते हुए माफी मांगी थी।
मामला आगे न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा और जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया।
SIT ने पूरी की जांच
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से बताया गया है कि मामले की जांच करने वाली SIT ने अपना काम पूरा कर लिया है।
इसका मतलब यह है कि अब जांच से संबंधित रिपोर्ट और सरकार द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के फैसले को लेकर आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
अभियोजन की मंजूरी से इनकार को अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं माना जा सकता कि विवादित टिप्पणी को लेकर न्यायिक स्तर पर सभी सवाल समाप्त हो गए हैं। अदालत के समक्ष सरकार की दलीलों और उपलब्ध जांच सामग्री पर आगे विचार किया जा सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
राज्य सरकार का पांच सूत्रीय जवाब सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सरकार के रुख और जांच से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगा। विशेष रूप से यह देखा जा सकता है कि अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के लिए सरकार द्वारा दिए गए आधार कानूनी रूप से कितने टिकाऊ हैं।
फिलहाल सरकार का स्पष्ट रुख है कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने का आधार नहीं बनता। दूसरी ओर, मामले से जुड़े कानूनी सवालों का अंतिम निर्धारण न्यायालय की कार्यवाही के आधार पर होगा।
सरकार के प्रमुख तर्क एक नजर में
- विजय शाह के बयान के संबंध में किसी व्यक्ति की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं किए जाने का दावा।
- सरकार के अनुसार, बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।
- मंत्री की ओर से किसी को अपमानित करने या ठेस पहुंचाने की मंशा नहीं होने की दलील।
- विवाद के बाद मंत्री द्वारा सार्वजनिक और लिखित रूप से माफी मांगने का उल्लेख।
- सरकार के अनुसार, बयान से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति सामने नहीं आई।
- मामले की जांच के लिए गठित SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है।
अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही अहम होगी, क्योंकि सरकार के अभियोजन मंजूरी से इनकार और SIT की जांच के निष्कर्ष दोनों न्यायिक विचार के दायरे में हैं।
