कुकी समुदाय के संगठन की इंफाल से दूर रहने की अपील के बावजूद दोनों विधायकों ने सदन में की मौजूदगी दर्ज; मुख्यमंत्री ने इसे विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक कदम बताया
इंफाल। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से जारी तनाव और हिंसा के बाद विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। करीब तीन साल के अंतराल के बाद दो कुकी विधायक व्यक्तिगत रूप से इंफाल पहुंचे और विधानसभा सत्र में शामिल हुए।
बुधवार, 2 सितंबर को कांगपोकपी जिले के सैकुल विधानसभा क्षेत्र से किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग और सैतू विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हाओखोलेट किपजेन विधानसभा सत्र में मौजूद रहे।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2023 में हिंसा भड़कने के बाद कुकी समुदाय के कई निर्वाचित प्रतिनिधि इंफाल में विधानसभा की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से बचते रहे हैं। कई विधायक अब तक वर्चुअल माध्यम से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेते रहे हैं।
समुदाय की अपील के बावजूद इंफाल पहुंचे विधायक
रिपोर्ट के अनुसार, कुकी समुदाय के संगठन कुकी इनपी मणिपुर ने कुकी प्रतिनिधियों से मैतेई-बहुल इंफाल से दूरी बनाए रखने की अपील की थी।
इसके बावजूद दोनों विधायकों ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्णय लिया। इसे मौजूदा परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, दोनों विधायकों के इस फैसले को लेकर उनके समुदाय की ओर से व्यापक प्रतिक्रिया क्या होगी, यह आगे स्पष्ट हो सकता है।
अन्य कुकी विधायक वर्चुअल माध्यम से जुड़े
मणिपुर विधानसभा में कुकी समुदाय से जुड़े कुल नौ विधायक हैं। इनमें कुकी पीपल्स अलायंस (KPA) के दो विधायक भी शामिल हैं।
विधानसभा की कार्यवाही में सभी कुकी विधायकों की व्यक्तिगत मौजूदगी नहीं रही। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन और उनके भाजपा सहयोगी तथा हेंगलेप से विधायक लेत्जामंग हाओकिप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सत्र से जुड़े।
वहीं, भाजपा के चार अन्य कुकी विधायक सत्र में शामिल नहीं हुए।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष फरवरी में हुए बजट सत्र के दौरान भी छह कुकी विधायकों ने ऑनलाइन माध्यम से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया था।
2023 की हिंसा के बाद बदले हालात
मणिपुर में मई 2023 में भड़की हिंसा ने राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच सामाजिक एवं राजनीतिक दूरी को काफी बढ़ा दिया। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और सामान्य राजनीतिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा।
इंफाल घाटी और कुकी बहुल पहाड़ी इलाकों के बीच आवाजाही तथा आपसी संपर्क को लेकर भी लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
ऐसे माहौल में कुकी विधायकों का व्यक्तिगत रूप से इंफाल पहुंचकर विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होना सामान्य राजनीतिक गतिविधियों की ओर लौटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया सकारात्मक कदम
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के कार्यालय की ओर से दोनों विधायकों की विधानसभा में व्यक्तिगत मौजूदगी का स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में इसे समुदायों के बीच दूरी कम करने और विधानसभा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
बयान के अनुसार, लंबे अंतराल के बाद कुकी समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदन में व्यक्तिगत उपस्थिति हुई है।
मुख्यमंत्री ने इसे राज्य में शांति और विश्वास बहाली के प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों के जरिए मणिपुर को दोबारा शांति और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
सरकार ने विश्वास बहाली के प्रयासों को दिया श्रेय
मुख्यमंत्री ने दोनों विधायकों के फैसले को भाजपा नेतृत्व वाली सरकार की ओर से किए जा रहे विश्वास बहाली के प्रयासों का परिणाम बताया।
सरकार का मानना है कि दोनों समुदायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद बढ़ने से राजनीतिक स्तर पर दूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, केवल विधानसभा में उपस्थिति से लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और राजनीतिक मतभेद समाप्त हो जाएंगे, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए सुरक्षा, विस्थापित लोगों की वापसी, राजनीतिक संवाद और दोनों समुदायों के बीच भरोसा बहाल करने जैसे कई मुद्दों पर लगातार प्रयास की जरूरत होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है दो कुकी विधायकों का इंफाल पहुंचना?
दोनों विधायकों की विधानसभा में व्यक्तिगत मौजूदगी को कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है—
पहला, इससे यह संदेश जाता है कि निर्वाचित प्रतिनिधि लोकतांत्रिक संस्थाओं में अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरा, लंबे समय से अलगाव और तनाव की स्थिति के बीच प्रत्यक्ष राजनीतिक संवाद की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
तीसरा, विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भविष्य में राजनीतिक समाधान की प्रक्रिया के लिए आधार तैयार कर सकती है।
चौथा, यह कदम समुदायों के बीच विश्वास बहाली के लिए चल रहे प्रयासों को राजनीतिक समर्थन मिलने के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
क्या इससे खत्म हो जाएगा मणिपुर का तनाव?
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। दो विधायकों की इंफाल यात्रा निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन मणिपुर में शांति स्थापित करना एक लंबी प्रक्रिया है।
2023 की हिंसा के बाद पैदा हुए अविश्वास, विस्थापन और सुरक्षा से जुड़े सवाल अभी भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों समुदायों के बीच स्थायी संवाद और राजनीतिक सहमति बनाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास की आवश्यकता होगी।
विधानसभा में कुकी विधायकों की वापसी को इसलिए एक शुरुआत या सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है, न कि समस्या के पूर्ण समाधान के रूप में।
आगे की राह पर नजर
मणिपुर में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य कुकी विधायक भी आने वाले समय में व्यक्तिगत रूप से विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होते हैं और क्या इस घटनाक्रम के बाद दोनों समुदायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद बढ़ता है।
यदि राजनीतिक स्तर पर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह राज्य में लंबे समय से बनी दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि, स्थायी शांति के लिए राजनीतिक पहल के साथ जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान भी उतना ही जरूरी होगा।
