मौजपुर प्ले स्कूल में बच्चे की पिटाई मामले में प्रिंसिपल से पूछताछ, बोलीं- ‘गलती हुई’; शिक्षिका और निदेशक फरार

क्राइम

साढ़े तीन साल के बच्चे से मारपीट के मामले में आया पहले गिरफ्तार, प्रिंसिपल को पूछताछ के बाद छोड़ा गया; स्कूल सील होने से 300 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के मौजपुर स्थित एक प्ले स्कूल में साढ़े तीन साल के बच्चे के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। मामले में स्कूल की प्रधानाचार्य नीलम से पुलिस ने पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जब उनसे पूछा गया कि कक्षा में बच्चे के साथ शिक्षिका और आया द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने के बावजूद स्कूल स्तर पर क्या कार्रवाई की गई, तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उनसे गलती हुई और वह कक्षाओं में हो रही गतिविधियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सकीं।

पुलिस ने पूछताछ के बाद प्रधानाचार्य को फिलहाल छोड़ दिया है, लेकिन उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जांच के दौरान जब भी पुलिस उन्हें बुलाएगी, उन्हें थाने में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा।

इस मामले में बच्चे को थप्पड़ मारने की आरोपित शिक्षिका सिमरन और स्कूल की निदेशक सुनीता बंसल अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं, स्कूल की आया पूजा को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

प्रिंसिपल से पुलिस ने पूछे सीधे सवाल

पुलिस ने प्रधानाचार्य नीलम से मुख्य रूप से यह जानने की कोशिश की कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होने के बावजूद बच्चे के साथ कथित मारपीट की जानकारी उन्हें क्यों नहीं हुई।

पुलिस ने उनसे यह भी पूछा कि जब शिक्षिका और आया बच्चे के साथ मारपीट कर रही थीं तो स्कूल प्रशासन की ओर से तत्काल क्या कदम उठाया गया।

पूछताछ के दौरान प्रधानाचार्य ने माना कि स्कूल की कक्षाओं में क्या हो रहा था, इस पर वह पर्याप्त निगरानी नहीं रख सकीं।

उनका कहना था कि उनसे गलती हुई है।

मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका और आया को नौकरी से हटाने की बात कही थी। हालांकि, पुलिस अब यह जांच कर रही है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे की सुरक्षा और शिकायत को लेकर वास्तव में क्या कदम उठाए और क्या किसी स्तर पर मामले को नजरअंदाज किया गया।

शिक्षिका सिमरन परिवार के साथ फरार

बच्चे के साथ कथित तौर पर मारपीट करने वाली शिक्षिका सिमरन अभी फरार बताई जा रही हैं। पुलिस के अनुसार, उनका मोबाइल फोन भी बंद है और वह अपने परिवार के साथ घर से गायब हैं।

पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। जांच टीम यह पता लगाने का भी प्रयास कर रही है कि शिक्षिका घटना के बाद कहां गईं और क्या उन्होंने जानबूझकर पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अपना फोन बंद किया।

फिलहाल पुलिस को उनकी गिरफ्तारी का इंतजार है।

स्कूल निदेशक को भी जांच में शामिल होने का नोटिस

स्कूल की निदेशक सुनीता बंसल को भी पुलिस ने जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया है।

पुलिस के अनुसार, निदेशक को मामले से संबंधित पूछताछ के लिए थाने पहुंचना होगा। संभावना जताई गई है कि वह एक-दो दिन में पुलिस के सामने जांच में शामिल हो सकती हैं।

जांच के दौरान पुलिस स्कूल के संचालन, कर्मचारियों की नियुक्ति, बच्चों की निगरानी व्यवस्था और घटना के बाद प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी जुटा रही है।

आया पूजा पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने स्कूल की आया पूजा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।

जाफराबाद थाना पुलिस ने बच्चे के अभिभावक की शिकायत के आधार पर मामले में POCSO एक्ट और मारपीट से संबंधित धाराओं के तहत चार लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया था।

अब पुलिस आरोपित शिक्षिका और निदेशक की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी और बच्चे की सुरक्षा से जुड़े स्कूल के दायित्वों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ।

बच्चे की काउंसलिंग, परिवार को मनोचिकित्सकीय सलाह

घटना के बाद बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

बच्चे के अभिभावक के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम चाइल्ड कमेटी की टीम उनके घर पहुंची और बच्चे की काउंसलिंग की। टीम सोमवार को एक बार फिर बच्चे से मिलने और उसकी काउंसलिंग करने के लिए घर आने वाली है।

परिवार को मनोचिकित्सक की ओर से भी सलाह दी गई है कि बच्चे को कुछ दिनों के लिए पहाड़ी क्षेत्र या किसी शांत स्थान पर ले जाया जाए।

विशेषज्ञों की सलाह के पीछे उद्देश्य बच्चे का वातावरण बदलना और उसके मन में घटना से पैदा हुए डर और तनाव को कम करना है।

स्कूल सील होने से 300 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। कार्रवाई के तहत स्कूल को सील कर दिया गया है। स्कूल में करीब 300 बच्चे पढ़ते हैं, जिनकी पढ़ाई फिलहाल प्रभावित हो रही है।

स्कूल सील होने के बाद बड़ी संख्या में बच्चे घर पर रहने को मजबूर हैं। अब अभिभावक स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभागों से यह जानना चाहते हैं कि उनके बच्चों की पढ़ाई आगे कैसे जारी रहेगी।

कई अभिभावकों का सवाल है कि कथित मारपीट की घटना के लिए उनके बच्चों की कोई जिम्मेदारी नहीं है, फिर स्कूल बंद होने का असर उनकी पढ़ाई पर क्यों पड़ रहा है।

अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चिंता—बच्चों की पढ़ाई कहां होगी?

अभिभावकों की चिंता केवल स्कूल बंद होने तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि स्कूल दोबारा खुलेगा या नहीं।

अगर स्कूल लंबे समय तक बंद रहता है या उसे दोबारा संचालित करने की अनुमति नहीं मिलती, तो यहां पढ़ने वाले करीब 300 बच्चों की पढ़ाई को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था कौन करेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है।

अभिभावक चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले में जल्द स्पष्ट जानकारी दे ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

दाखिले के समय स्कूल ने सभी विभागों की अनुमति होने का दावा किया था

अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है।

उनका कहना है कि बच्चों का दाखिला कराते समय स्कूल की ओर से यह दावा किया गया था कि उसके पास संबंधित विभागों की सभी आवश्यक अनुमतियां हैं।

अभिभावकों के अनुसार, दाखिले के समय करीब 15 हजार रुपये लिए गए थे। इसके अलावा वर्दी और खाने के लिए अलग से शुल्क लिया जाता था।

अब स्कूल सील होने के बाद अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि स्कूल की मान्यता और विभिन्न विभागों से मिली अनुमतियों की वास्तविक स्थिति क्या थी।

प्रबंधन की जवाबदेही पर भी उठे सवाल

बच्चे के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद अब स्कूल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है।

पुलिस की पूछताछ में प्रधानाचार्य द्वारा यह स्वीकार किया जाना कि कक्षाओं में क्या हो रहा था, इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका, स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्ले स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र बहुत कम होती है और वे कई बार अपने साथ हुई घटना को स्पष्ट तरीके से अभिभावकों को बता भी नहीं पाते। ऐसे में स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और सहायकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

अब आगे क्या?

फिलहाल पुलिस की जांच तीन प्रमुख दिशाओं में आगे बढ़ रही है—

  1. फरार शिक्षिका सिमरन की गिरफ्तारी।
  2. स्कूल निदेशक सुनीता बंसल से पूछताछ और उनकी भूमिका की जांच।
  3. घटना के दौरान और उसके बाद स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करना।

इसके साथ ही बच्चे की काउंसलिंग और उसकी मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

300 बच्चों के भविष्य पर भी फैसला जरूरी

मौजपुर के इस मामले में कार्रवाई केवल आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एक तरफ बच्चे के साथ कथित मारपीट की जांच और दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ स्कूल में पढ़ने वाले करीब 300 बच्चों की शिक्षा का भविष्य भी प्रभावित नहीं होना चाहिए।

अभिभावकों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और स्कूल बंद रहने की स्थिति में उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए स्पष्ट वैकल्पिक व्यवस्था बताए।

फिलहाल शिक्षिका और स्कूल निदेशक की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि आया पूजा पहले ही गिरफ्तार की जा चुकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।

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