नई दिल्ली | (Action Bharat) दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी की कथित रूप से नृशंस हत्या और शव के टुकड़े कर सेप्टिक टैंक में छिपाने के मामले में आरोपी आशु पाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी अपने आप में जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है।
तीन बेटियां होने के बाद प्रताड़ना का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मृतका के भाई ने आरोप लगाया था कि तीन बेटियों को जन्म देने के कारण महिला को उसके पति और ससुराल पक्ष की ओर से प्रताड़ित किया जाता था। शिकायत में दहेज की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया गया था।
हालांकि, ये आरोप मामले की न्यायिक प्रक्रिया में परीक्षण के अधीन हैं।
2019 में सामने आया था मामला
पुलिस के अनुसार, 22 फरवरी 2019 को आशु पाल थाने पहुंचा और कथित तौर पर बताया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है तथा शव के टुकड़े करके अवशेष सेप्टिक टैंक में डाल दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार, इसके बाद महिला के भाई को घर में खून के निशान मिले और सेप्टिक टैंक से शव के अवशेष बरामद किए गए।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत?
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि मृतका की मां और भाई के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष ने मुकदमे की धीमी गति का हवाला देते हुए जमानत की मांग की।
लेकिन हाई कोर्ट ने अपराध की कथित गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि सिर्फ मुकदमे में देरी को आधार बनाकर ऐसे गंभीर आरोपों में जमानत नहीं दी जा सकती।
⚖️ कोर्ट का संदेश
इस मामले में अदालत के सामने आरोप केवल हत्या तक सीमित नहीं थे, बल्कि अभियोजन के अनुसार हत्या के बाद शव को टुकड़ों में करके छिपाने की बात भी सामने आई। इसी गंभीरता को अदालत ने जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना।
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