काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच एक अनजान व्यक्ति की समय पर दी गई चेतावनी ने 370 से ज्यादा स्कूली बच्चों और शिक्षकों की जान बचा ली। बेत्रावती स्थित उत्तरगया पब्लिक स्कूल में बुधवार सुबह बच्चे और शिक्षक रोज की तरह स्कूल की गतिविधियों में जुटे थे। इसी दौरान कैंपस के बाहर से एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया और जोर से चेतावनी दी—‘बाढ़ आ रही है, भागो।’
उस समय स्कूल में मौजूद लोगों को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में हालात इतने भयावह हो जाएंगे। स्कूल प्रशासन के मुताबिक, बच्चों को बचाने के लिए कोई सायरन, ऑटोमेटेड मैसेज या आधिकारिक अलर्ट पहले नहीं मिला था। ऐसे में बाहर से आए इस अज्ञात व्यक्ति की चेतावनी ही स्कूल के लिए पहला बड़ा संकेत बनी।
कुछ ही मिनटों में बच्चों को सुरक्षित जगह ले जाया गया
बाढ़ की चेतावनी मिलते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। 370 से अधिक छात्र और शिक्षक कैंपस के पीछे जंगल वाली पहाड़ी की ओर भागने लगे। पानी का तेज बहाव सड़क और बाहर निकलने के रास्तों को काट रहा था, इसलिए बच्चों और स्टाफ के पास सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय था।
सातवीं से दसवीं कक्षा के बड़े छात्र खुद पहाड़ी की ओर भागे, जबकि छोटे बच्चों को शिक्षकों और स्कूल स्टाफ ने संभाला। जो बच्चे कीचड़ और तेज बहाव के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे थे, उन्हें कुछ कर्मचारियों ने गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
इस तरह एक अज्ञात व्यक्ति की कुछ शब्दों की चेतावनी ने स्कूल में मौजूद सैकड़ों लोगों को समय रहते खतरे से बाहर निकलने का मौका दे दिया।
कोई आधिकारिक अलर्ट नहीं मिला था
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्कूल तक बाढ़ का खतरा पहुंचने से पहले कोई सायरन या स्वचालित सरकारी चेतावनी संदेश नहीं पहुंचा था।
स्कूल में उस समय हॉस्टल के बच्चे नाश्ता कर रहे थे और सामान्य गतिविधियां शुरू ही हुई थीं। अचानक कैंपस के बाहर से आई आवाज ने पूरे स्कूल को सतर्क कर दिया।
अगर यह चेतावनी कुछ मिनट और देर से मिलती, तो तेज बहाव के बीच बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो सकता था।
बेटे को बचाने निकले पिता की बाढ़ में मौत
इस त्रासदी का दूसरा पहलू बेहद दर्दनाक है। बाढ़ की जानकारी मिलने के बाद नवराज तमांग अपने दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे आयुष को स्कूल से लेने के लिए घर से निकले।
उन्होंने निकलने से पहले अपनी पत्नी मुंगसी तमांग से कहा था कि वह आयुष को लेने जा रहे हैं। लेकिन स्कूल पहुंचने से पहले ही नवराज तेज बाढ़ के बहाव में बह गए और उनकी मौत हो गई।
दूसरी ओर, आयुष ने स्कूल के अन्य बच्चों के साथ जंगल की ओर भागकर अपनी जान बचा ली।
एक तरफ जहां एक अनजान व्यक्ति की चेतावनी ने सैकड़ों बच्चों को बचा लिया, वहीं दूसरी तरफ बेटे को सुरक्षित घर लाने की कोशिश में निकले एक पिता की जान चली गई।
नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लापता लोगों और बरामद शवों की पहचान भी बन गई है। कई शवों की पहचान नहीं हो पा रही है और कुछ मामलों में एक ही शव पर अलग-अलग परिवारों द्वारा दावा किए जाने के बाद DNA जांच करानी पड़ रही है।
उत्तरगया पब्लिक स्कूल की घटना इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक तरफ चेतावनी व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाती है, तो दूसरी तरफ यह बताती है कि संकट के समय कुछ सेकंड की सही सूचना भी सैकड़ों जिंदगियां बचा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल
इस घटना के बाद एक अहम सवाल भी खड़ा होता है—जब किसी इलाके में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो, तो वहां मौजूद स्कूलों और आम लोगों तक आधिकारिक आपदा चेतावनी कितनी जल्दी पहुंचती है?
उत्तरगया स्कूल के मामले में समय पर मिली चेतावनी किसी आधिकारिक सिस्टम से नहीं, बल्कि एक अनजान व्यक्ति से आई। उसकी पहचान भले अभी सामने नहीं आई है, लेकिन उसकी एक आवाज ने 370 से ज्यादा जिंदगियों को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
