उत्तर प्रदेश (Action Bharat) | बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलाव का दौर तेज हो गया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी नियुक्त किया है। ईशान आनंद को करीब 15 राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
इस फैसले के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाए गए आकाश आनंद की भूमिका को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आकाश आनंद को पिछले सप्ताह ही मायावती ने राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था। अब छोटे भाई ईशान आनंद को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने को बसपा की भविष्य की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ईशान आनंद को 15 राज्यों की जिम्मेदारी
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ईशान आनंद अब करीब 15 राज्यों में बसपा की संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के कामकाज की समीक्षा करेंगे। वह इन राज्यों में संगठन की स्थिति, गतिविधियों और पार्टी के कामकाज का फीडबैक जुटाने का काम करेंगे।
बताया गया है कि ईशान आनंद अपनी जिम्मेदारियों को लेकर मायावती के साथ-साथ अपने पिता और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को भी रिपोर्ट करेंगे। हाल के दिनों में ईशान आनंद की पार्टी की गतिविधियों में मौजूदगी बढ़ी है। वह राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में भी शामिल हुए थे और मायावती के जन्मदिन के कार्यक्रम में भी नजर आए थे।
आकाश आनंद के पद छिनने के बाद बदला राजनीतिक माहौल
आकाश आनंद को लेकर बसपा में घटनाक्रम तेजी से बदला है। इस वर्ष मार्च में उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था, जिसके करीब एक महीने बाद उनकी वापसी हुई। इसके बाद मई में मायावती ने उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी थी।
हालांकि, यह जिम्मेदारी लंबे समय तक नहीं चली। पिछले सप्ताह मायावती ने आकाश आनंद को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताते हुए उनसे राष्ट्रीय समन्वयक का पद वापस ले लिया।
अब ईशान आनंद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने के बाद बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक भूमिका को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
आकाश ने सोशल मीडिया बायो में फिर किया बदलाव
मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल का बायो भी बदल दिया है। पहले उन्होंने खुद को ‘बसपा वर्कर’ बताया था, लेकिन अब बायो में उन्होंने खुद को ‘बसपा सपोर्टर’ बताया है।
बताया जा रहा है कि आकाश ने महज कुछ दिनों के भीतर दूसरी बार अपना बायो बदला है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि मायावती ने अभी आकाश आनंद को दोबारा पार्टी से निष्कासित किए जाने की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इसलिए उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर फिलहाल अंतिम तस्वीर साफ नहीं है।
अशोक सिद्धार्थ भी पार्टी से बाहर
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ भी हाल के महीनों में बसपा नेतृत्व के फैसले का सामना कर चुके हैं। मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है और पार्टी नेतृत्व की ओर से यह संकेत दिया गया है कि उनके लिए बसपा में वापसी की संभावना नहीं है।
इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि पार्टी नेतृत्व ने बसपा के पदाधिकारियों से आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने को कहा है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत पुष्टि सामने नहीं आई है।
रामजी गौतम और लालाराम की भूमिका भी बढ़ने की चर्चा
बसपा के संगठनात्मक फेरबदल में केवल ईशान आनंद ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां बढ़ाए जाने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम और लालाराम को भी अतिरिक्त राज्यों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पार्टी के भीतर इन बदलावों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। मायावती की कोशिश संगठन को सक्रिय करने और विभिन्न राज्यों में पार्टी की राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करने की बताई जा रही है।
आकाश बनाम ईशान की चर्चा के बीच बसपा में नई रणनीति
आकाश आनंद को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी से हटाने और उसके बाद ईशान आनंद को 15 राज्यों में संगठन की निगरानी का दायित्व देने से बसपा की आंतरिक राजनीति पर चर्चा बढ़ गई है।
हालांकि, ईशान आनंद की नियुक्ति को सीधे तौर पर आकाश आनंद के विकल्प के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि मायावती के हालिया फैसलों से बसपा के संगठनात्मक ढांचे और आने वाले चुनावों की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से और जिम्मेदारियों में फेरबदल होता है या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
