बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; जानें खुद को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय

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बिहार (Action Bharat) | बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गंगा, पुनपुन समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों और 368 ग्राम पंचायतों में करीब 22.42 लाख आबादी के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे हालात में प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करना और बाढ़ से पहले ही जरूरी तैयारियां पूरी कर लेना बेहद महत्वपूर्ण है।

बाढ़ जैसी आपदा के दौरान थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए घर में जरूरी सामान रखने से लेकर बिजली और पानी से जुड़े खतरों से बचने तक कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी है।

बाढ़ आने से पहले क्या करें?

बाढ़ का खतरा होने पर सबसे पहले मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखें। जरूरी स्थिति में कॉल के साथ SMS का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। टीवी, रेडियो और प्रशासन या मौसम विभाग से मिलने वाले आधिकारिक संदेशों पर लगातार नजर रखें। अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय केवल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी को प्राथमिकता दें।

घर में एक आपातकालीन किट तैयार रखें। इसमें प्राथमिक उपचार का सामान, जरूरी दवाएं, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था और जरूरी दस्तावेज शामिल किए जा सकते हैं।

आधार कार्ड, वोटर आईडी, बैंक से जुड़े जरूरी कागजात और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को वाटरप्रूफ बैग या प्लास्टिक कवर में सुरक्षित रखें।

इसके अलावा कम से कम कुछ दिनों के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ उपलब्ध रखें जिन्हें बिना ज्यादा तैयारी के खाया जा सके, जैसे बिस्किट, चूड़ा, सत्तू, लाई, भुना चना, गुड़, नमक और चीनी

सुरक्षित स्थान पहले से पहचानें

अपने इलाके में ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की जानकारी पहले से रखें। प्रशासन द्वारा बताए गए राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने वाले रास्ते की जानकारी परिवार के सभी सदस्यों को होनी चाहिए।

नहर, नाला, जल निकासी चैनल और अन्य ऐसे स्थानों की पहचान करें जहां अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता है।

यदि तटबंध में किसी तरह की क्षति दिखाई देती है तो खुद मरम्मत करने या वहां भीड़ लगाने के बजाय तुरंत स्थानीय प्रशासन, अंचल अधिकारी (CO), प्रखंड या जिला प्रशासन को सूचना दें।

बाढ़ के दौरान इन गलतियों से बचें

बाढ़ का पानी दिखाई देने पर उसमें प्रवेश करने से बचें। पानी के भीतर सड़क, गड्ढे, खुले मैनहोल, नाले या सीवर लाइन का पता नहीं चलता और हादसा हो सकता है।

बाढ़ के पानी में पैदल चलने या वाहन चलाने की कोशिश न करें। तेज बहाव वाला पानी वाहन का संतुलन बिगाड़ सकता है और व्यक्ति को बहा सकता है।

बिजली के खंभों, टूटे हुए तारों और पानी में गिरे विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखें। पानी और बिजली का संपर्क गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

यदि किसी खुले नाले या मैनहोल का पता चलता है तो उसे लाल झंडे, बैरिकेड या किसी स्पष्ट संकेत से चिह्नित करने की कोशिश करें, ताकि दूसरे लोग वहां न जाएं।

पीने के पानी और खाने का रखें विशेष ध्यान

बाढ़ के दौरान दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए उबला हुआ या क्लोरीनयुक्त पानी ही पीने की सलाह दी जाती है।

खाना ढककर रखें और संभव हो तो ताजा पका हुआ या सूखा भोजन ही खाएं। बाढ़ के पानी के संपर्क में आए खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

जरूरत पड़ने पर सुरक्षित नाव से ही निकलें

अगर कोई व्यक्ति बाढ़ के पानी में फंस गया है और वहां से निकलना जरूरी है तो प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षित नाव या SDRF की मोटरबोट का इस्तेमाल करें।

छोटी निजी नाव, डोंगी या असुरक्षित साधन से तेज बहाव वाले पानी को पार करने की कोशिश न करें।

आपात स्थिति में बिहार बाढ़ हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा स्थानीय CO, प्रखंड नियंत्रण कक्ष या जिला प्रशासन को भी स्थिति की जानकारी दें।

घर खाली करने की स्थिति में क्या करें?

यदि प्रशासन घर खाली करने का निर्देश देता है तो समय गंवाए बिना सुरक्षित स्थान की ओर निकलें। घर छोड़ने से पहले:

  • बिजली और गैस का कनेक्शन बंद करें।
  • जरूरी दस्तावेज और कीमती सामान अपने साथ लें।
  • प्राथमिक उपचार की किट और आवश्यक दवाएं रखें।
  • फर्नीचर और जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान को संभव हो तो ऊंचे स्थान पर रखें।
  • परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क बनाए रखने की योजना पहले से तय करें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता के साथ सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
  • गहरे या अनजान पानी में जाने से बचें।

घर के शौचालय और नालियों से गंदा पानी वापस आने की आशंका हो तो उपलब्ध सुरक्षित उपायों से उन्हें बंद करने की व्यवस्था करें।

बाढ़ के बाद भी खतरा खत्म नहीं होता

बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी सावधानी बेहद जरूरी है। बच्चों को जमा हुए पानी में खेलने न दें। टूटे हुए बिजली के खंभों, तारों, नुकीली वस्तुओं और मलबे से दूर रहें।

गीले बिजली के उपकरणों को हाथ न लगाएं और क्षतिग्रस्त विद्युत व्यवस्था की जांच विशेषज्ञ से करवाएं। यदि बिजली के उपकरण पानी में डूब गए हैं तो उनकी जांच के बिना इस्तेमाल न करें।

बाढ़ के पानी के संपर्क में आया भोजन इस्तेमाल न करें। दूषित पानी और गंदगी के कारण संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए साफ-सफाई और कीटाणुनाशक का उपयोग करें तथा मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

यदि पानी की लाइन या सीवेज पाइप क्षतिग्रस्त हो गई है तो तब तक नल के पानी या संबंधित शौचालय व्यवस्था का इस्तेमाल न करें, जब तक उसकी सुरक्षा की पुष्टि न हो जाए।

घर लौटने में जल्दबाजी न करें

बाढ़ के बाद घर वापस तभी लौटें जब स्थानीय प्रशासन सुरक्षित लौटने की अनुमति या निर्देश दे। घर में प्रवेश करते समय बिजली, गैस रिसाव, कमजोर दीवारों और दूषित पानी जैसे खतरों की जांच जरूरी है।

बाढ़ के समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घबराएं नहीं, अफवाहों पर भरोसा न करें और प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें। समय रहते तैयारी और सही सावधानी कई गंभीर हादसों को टाल सकती है।

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