बिजनेस (Action Bharat) | अपना घर खरीदना हर व्यक्ति का बड़ा सपना होता है, लेकिन घर खरीदने का फैसला केवल भावनाओं के आधार पर लेना भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब घर की कीमत आपकी आय के मुकाबले बहुत ज्यादा हो और होम लोन की EMI आपकी मासिक कमाई का बड़ा हिस्सा खा जाए।
वित्तीय योजना से जुड़े विशेषज्ञ अक्सर घर खरीदने से पहले 3-20-30-40 के नियम को ध्यान में रखने की सलाह देते हैं। यह कोई कानूनी या अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि एक वित्तीय प्लानिंग का thumb rule है, जिसकी मदद से खरीदार अपनी क्षमता के अनुसार घर का बजट तय कर सकता है।
3 का नियम: सालाना आय के 3 गुने से ज्यादा न हो घर की कीमत
इस नियम के मुताबिक घर की कुल कीमत आपकी सालाना पारिवारिक इन-हैंड आय के करीब तीन गुने तक रखना बेहतर माना जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर पति-पत्नी की संयुक्त सालाना इन-हैंड आय ₹15 लाख है, तो इस thumb rule के हिसाब से करीब ₹45 लाख तक के घर पर विचार किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य यह है कि खरीदार अपनी आय की तुलना में जरूरत से ज्यादा बड़ा होम लोन न ले। हालांकि, वास्तविक बजट तय करते समय शहर में प्रॉपर्टी की कीमत, आय की स्थिरता, मौजूदा बचत और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
20 का नियम: कम से कम 20% डाउन पेमेंट
3-20-30-40 नियम में अगला आंकड़ा 20 है। इसका मतलब है कि घर की कीमत का कम से कम 20% हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देने की कोशिश की जाए।
मान लीजिए घर की कीमत ₹50 लाख है। ऐसे में 20% डाउन पेमेंट करीब ₹10 लाख होगा और बाकी करीब ₹40 लाख के लिए होम लोन लिया जा सकता है।
जितना अधिक डाउन पेमेंट होगा, उतना कम लोन लेना पड़ेगा। इससे सामान्य परिस्थितियों में ब्याज की कुल लागत और EMI का बोझ कम हो सकता है।
हालांकि, डाउन पेमेंट के लिए अपनी पूरी बचत खत्म कर देना भी सही रणनीति नहीं है। घर खरीदने के बाद इमरजेंसी फंड और अन्य जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त रकम बची रहनी चाहिए।
30 का नियम: होम लोन EMI आय के 30% के आसपास रखें
तीसरा आंकड़ा 30 है। इसके अनुसार आपकी होम लोन EMI आपकी मासिक टेक-होम आय के करीब 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उदाहरण के लिए अगर आपकी मासिक इन-हैंड आय ₹1 लाख है, तो इस thumb rule के मुताबिक करीब ₹30,000 तक की होम लोन EMI रखना अधिक आरामदायक माना जा सकता है।
इससे घर की EMI चुकाने के बाद राशन, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च, बिजली-पानी, यात्रा और अन्य जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त रकम बच सकती है।
40 का नियम: सभी कर्जों की EMI 40% से ज्यादा न हो
सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 40 है। इसका मतलब है कि आपकी सभी तरह की EMI मिलाकर मासिक आय के करीब 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
मसलन, यदि आपकी मासिक आय ₹1 लाख है और होम लोन की EMI ₹30,000 है, तो कार लोन, पर्सनल लोन या अन्य कर्ज की कुल EMI को करीब ₹10,000 तक सीमित रखने का प्रयास किया जा सकता है। इस तरह कुल EMI ₹40,000 यानी आय के 40% के भीतर रहेगी।
इसका मकसद यह है कि आपकी आय का बाकी हिस्सा घरेलू खर्च, बचत, निवेश और इमरजेंसी जरूरतों के लिए उपलब्ध रहे।
घर खरीदने से पहले सिर्फ EMI नहीं, ये खर्च भी देखें
घर खरीदते समय केवल होम लोन और EMI का हिसाब लगाना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को रजिस्ट्रेशन, स्टांप ड्यूटी, मेंटेनेंस, इंटीरियर, फर्नीचर, बीमा और अन्य शुरुआती खर्चों को भी अपने बजट में शामिल करना चाहिए।
इसके अलावा, नौकरी या कारोबार की आय में संभावित बदलाव, परिवार की भविष्य की जरूरतें और बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े खर्च भी ध्यान में रखने चाहिए।
निष्कर्ष
3-20-30-40 नियम को एक आसान वित्तीय गाइड की तरह समझा जा सकता है—
- 3: घर की कीमत सालाना इन-हैंड पारिवारिक आय के करीब 3 गुने तक रखने का प्रयास।
- 20: कम से कम 20% डाउन पेमेंट का लक्ष्य।
- 30: होम लोन EMI मासिक आय के करीब 30% तक रखने की कोशिश।
- 40: सभी कर्जों की कुल EMI मासिक आय के 40% से ऊपर न जाने देना।
हालांकि, हर व्यक्ति की आय, बचत, शहर, ब्याज दर और पारिवारिक जिम्मेदारियां अलग होती हैं। इसलिए घर खरीदने से पहले इस नियम को अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति के साथ मिलाकर देखना ज्यादा समझदारी होगी।
