ईरान का अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन पकड़ने का दावा, अमेरिका ने 36 ठिकानों पर बढ़ाया प्रतिबंधों का दबाव

विदेश

तेहरान (Action Bharat) | अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य एवं आर्थिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक नया विवाद सामने आया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना के एक मानवरहित अंडरवाटर ड्रोन को कब्जे में लिया है। हालांकि, अमेरिकी सरकार या सेना की ओर से इस दावे की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है।

इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसके विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 संस्थानों और व्यक्तियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए हैं।

• होर्मुज के पास अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन पकड़ने का दावा

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र के पास एक अत्याधुनिक मानवरहित अंडरवाटर वाहन को कब्जे में लेने का दावा किया है।

ईरान का कहना है कि यह उपकरण समुद्र के भीतर निगरानी और खुफिया अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरानी मीडिया ने इसे सैन्य कार्रवाई में हासिल की गई एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर पेश किया है।

• ड्रोन को लेकर अमेरिकी पक्ष से पुष्टि नहीं

रिपोर्टों के अनुसार, जिस अंडरवाटर वाहन का जिक्र किया जा रहा है, वह अमेरिकी रक्षा तकनीक कंपनी एंड्यूरिल का Dive-LD मानवरहित अंडरवाटर वाहन हो सकता है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में अमेरिकी नौसेना की एक यूनिट को पहला Dive-LD सौंपा था।

हालांकि, ईरान के इसे पकड़ने के दावे की अमेरिकी सरकार या अमेरिकी सेना ने तत्काल पुष्टि नहीं की है। इसलिए ड्रोन की जब्ती से जुड़ी जानकारी को फिलहाल ईरानी दावा ही माना जा रहा है।

• अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर कसा शिकंजा

ड्रोन विवाद के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े 36 संस्थानों और व्यक्तियों को प्रतिबंधों के दायरे में शामिल किया है।

अमेरिकी कार्रवाई में ईरानी एयरलाइंस के साथ-साथ विदेशी कंपनियां और कारोबारी नेटवर्क भी शामिल बताए गए हैं। इन पर ईरान को विमान, कलपुर्जे और तकनीकी सहायता हासिल करने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।

• ईरानी एयरलाइंस और बिचौलिये भी निशाने पर

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की बची हुई विमानन और वित्तीय कड़ियों को कमजोर करना है। कार्रवाई में उन बिचौलियों और कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है, जिन पर अमेरिकी मूल के विमानों और संवेदनशील तकनीक की खरीद में तेहरान की मदद करने का आरोप है।

अमेरिका का फोकस सामान्य विमानन कारोबार के बजाय उन नेटवर्क पर है, जिन्हें वह हथियार, सैन्य कर्मियों और प्रतिबंधित सामान की आवाजाही से जोड़ता है।

• ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई

अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा है। इस अभियान का घोषित उद्देश्य ईरान की आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी बची हुई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को कमजोर करना है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि ईरान की एयरलाइंस को आर्थिक या कारोबारी सहायता देने वाले संस्थानों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

• सैन्य तनाव के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा

एक ओर ईरान अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन को पकड़ने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के साथ आर्थिक दबाव की स्थिति भी और गंभीर होती दिखाई दे रही है।

हालांकि ड्रोन की कथित जब्ती की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यह घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को जरूर सामने लाता है।

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