कॉपर की कीमतों में बड़ा भूचाल, 30 मिनट में 4.60% तक टूटे दाम; अमेरिका के टैरिफ फैसले ने बढ़ाई बाजार की चिंता

कारोबार

नई दिल्ली (Action Bharat) | ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में गुरुवार को कॉपर की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी प्रशासन की ओर से रिफाइंड कॉपर पर टैरिफ को लेकर अंतिम फैसला स्पष्ट नहीं होने की खबर सामने आने के बाद महज करीब 30 मिनट में कॉपर के दाम 4.50 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। इस अचानक गिरावट से निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच हलचल बढ़ गई और बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली।

व्हाइट हाउस के फैसले में देरी से बढ़ी बाजार की बेचैनी

कॉपर बाजार में तेज गिरावट उस समय आई जब यह खबर सामने आई कि अमेरिकी प्रशासन ने रिफाइंड कॉपर पर संभावित टैरिफ को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।

अमेरिकी अधिकारियों के सामने एक तरफ घरेलू माइनिंग को बढ़ावा देने की संभावना है, तो दूसरी तरफ कॉपर पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स की उत्पादन लागत बढ़ने का डर भी है। इसी नीतिगत असमंजस ने बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया।

COMEX पर कॉपर करीब 4.60% लुढ़का

अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर कॉपर की कीमत में करीब 4.60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं भारतीय बाजार MCX पर भी कॉपर का भाव 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया।

MCX पर कॉपर की कीमत करीब 60 रुपये की गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर 1,370 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। हालांकि निचले स्तर पर कुछ खरीदारी लौटने के बाद कीमत में हल्की रिकवरी देखी गई और यह करीब 1,385 रुपये के आसपास कारोबार करती नजर आई।

टैरिफ को लेकर अमेरिका में क्या है असमंजस?

अमेरिकी अधिकारियों के सामने मुख्य सवाल यह है कि कॉपर पर टैरिफ लगाने से क्या घरेलू माइनिंग को वास्तव में बढ़ावा मिलेगा। दूसरी ओर, अगर कॉपर महंगा होता है तो इससे अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।

इसी दोहरी चिंता के कारण अमेरिका की नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर कॉपर की कीमतों पर दिखाई दिया और बाजार में अचानक बड़ी बिकवाली शुरू हो गई।

कोटक सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट ने बताई गिरावट की वजह

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक कॉपर में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से संभावित अमेरिकी टैरिफ के इर्द-गिर्द बनाए गए ट्रेड के अनवाइंडिंग यानी सौदों के काटे जाने की वजह से हुई।

उनके अनुसार, खरीदारों ने पहले ही अमेरिका में बड़ी मात्रा में मेटल का स्टॉक जमा कर लिया था। इससे अन्य जगहों पर सप्लाई टाइट हुई और भारी इन्वेंट्री के बावजूद कीमतें ऊंची बनी रहीं। लेकिन वाशिंगटन की नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण यह ट्रेड कमजोर पड़ गया।

हालिया शिखर से कॉपर में करीब 4% की गिरावट

अनिंद्य बनर्जी के अनुसार MCX पर कॉपर अपने हालिया पीक करीब 1,430 रुपये प्रति किलोग्राम से फिसलकर लगभग 1,375 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ गया। यह पिछले शिखर की तुलना में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट है।

हालांकि विशेषज्ञ के मुताबिक कॉपर की इस गिरावट को वैश्विक औद्योगिक मांग में किसी बड़े पतन का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।

निवेशकों के लिए आगे अमेरिका का फैसला अहम

कॉपर की कीमतों की अगली दिशा अब काफी हद तक अमेरिका के अंतिम टैरिफ फैसले और वास्तविक मांग पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिकी नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट होती है तो बाजार में मौजूदा अस्थिरता कम हो सकती है।

दूसरी ओर, यदि भारतीय बाजार में कॉपर की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो कॉपर का इस्तेमाल करने वाले भारतीय निर्माताओं को कच्चे माल की लागत में राहत मिल सकती है।

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