PM मोदी और UAE क्राउन प्रिंस की मुलाकात, ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर के एल्युमीनियम प्रोजेक्ट का ऐलान

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नई दिल्ली (Action Bharat)। भारत में निवेश को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच शनिवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) की ओर से ओडिशा में एक बड़े एल्युमीनियम प्रोजेक्ट में 11.5 अरब डॉलर यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी सामने आई है।

यह निवेश एक इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे भारत में एल्युमीनियम क्षेत्र के सबसे बड़े एकीकृत निवेशों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद है कि इस परियोजना से ओडिशा की एल्युमीनियम मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और राज्य को वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई अहम मुलाकात

भारत इस समय ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में भाग लेने के लिए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत पहुंचे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार, 12 सितंबर को हैदराबाद हाउस में क्राउन प्रिंस के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और UAE के बीच लगातार मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की समीक्षा की।

ओडिशा में लगेगा 11.5 अरब डॉलर का एल्युमीनियम प्रोजेक्ट

बैठक के बाद सामने आए निवेश प्रस्ताव के मुताबिक UAE की IHC ओडिशा में एक इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम परियोजना स्थापित करेगी।

इस परियोजना में 11.5 अरब डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। भारतीय मुद्रा में इसकी रकम लगभग एक लाख करोड़ रुपये बैठती है।

प्रस्तावित परियोजना को लेकर यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह भारत के एल्युमीनियम क्षेत्र में सबसे बड़े एकीकृत निवेशों में शामिल हो सकती है और ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में भूमिका निभा सकती है।

भारत-UAE आर्थिक रिश्तों के लिए बड़ा कदम

भारत और UAE के बीच पिछले वर्षों में व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में IHC का इतना बड़ा निवेश प्रस्ताव दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और गहरा करने वाला कदम माना जा रहा है।

बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की भी समीक्षा की और भविष्य में निवेश तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा की।

कौन है International Holding Company?

UAE की International Holding Company (IHC) अबू धाबी के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, IHC में अबू धाबी के बिजनेस ग्रुप रॉयल ग्रुप की बड़ी हिस्सेदारी है।

रॉयल ग्रुप पर UAE के शासक अल नाहयान परिवार का नियंत्रण बताया गया है और स्रोत के मुताबिक परिवार की IHC में करीब 61 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

IHC के चेयरमैन शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान हैं। वह UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भाई और UAE के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं। IHC अबू धाबी सिक्योरिटीज एक्सचेंज (ADX) में सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी है, इसलिए इसमें संस्थागत और सार्वजनिक निवेशकों की भी हिस्सेदारी है।

BRICS सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर

प्रधानमंत्री मोदी और UAE के क्राउन प्रिंस की बैठक में केवल द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर ही चर्चा नहीं हुई। दोनों नेताओं ने BRICS सहयोग को मजबूत करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंच के माध्यम से मिलकर काम जारी रखने पर भी सहमति जताई।

भारत और UAE के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग के साथ BRICS के स्तर पर समन्वय बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड पर भी चर्चा

बैठक में दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा हुई। इसके साथ UAE के नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड ‘L’Imad’ की संभावित भूमिका पर भी बातचीत हुई।

स्रोत के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा की।

2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था UAE

UAE जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और सऊदी अरब के साथ BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी समूह का पूर्ण सदस्य बना।

इस तरह भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ BRICS के मंच पर भी दोनों देशों के बीच समन्वय का महत्व बढ़ गया है।

ओडिशा के लिए भी बड़ा आर्थिक अवसर

11.5 अरब डॉलर के प्रस्तावित एल्युमीनियम प्रोजेक्ट से ओडिशा के औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यदि परियोजना योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है तो इससे राज्य की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता, औद्योगिक निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका मजबूत हो सकती है।

फिलहाल यह निवेश घोषणा भारत-UAE आर्थिक साझेदारी के विस्तार का एक बड़ा संकेत है। आने वाले समय में परियोजना की विस्तृत योजना, निर्माण और निवेश से जुड़ी अन्य शर्तें सामने आने के बाद इसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन अधिक स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा।

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