नई दिल्ली (Action Bharat)। भारतीय शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स से जुड़ी व्यवस्था में आने वाले समय में बदलाव हो सकता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी करते हुए डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स, एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया, बाजार की टाइमिंग और हाल में लागू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के संचालन में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
सेबी ने खास तौर पर एक्सपायरी के दिन इंडेक्स और सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं। इसके अलावा ट्रेडिंग सेशन की टाइमिंग और CAS के बाद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध समय को भी बदलने का प्रस्ताव है।
• सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए दो विकल्प
सेबी के प्रस्ताव में एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के लिए दो संभावित तरीके सामने रखे गए हैं।
पहले विकल्प में ब्लेंडेड VWAP (Volume-Weighted Average Price) अपनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत लगातार चलने वाले सामान्य ट्रेडिंग सेशन यानी Continuous Trading Session (CTS) के आखिरी 30 मिनट और 10 मिनट के Closing Auction Session (CAS) के दौरान हुए कारोबार को सेटलमेंट प्राइस तय करने में शामिल किया जाएगा।
सेबी का तर्क है कि इससे बाजार में वास्तविक ट्रेडिंग गतिविधि की ज्यादा अवधि को सेटलमेंट कीमत में शामिल किया जा सकेगा।
• दूसरा विकल्प: मौजूदा CTS VWAP को जारी रखना
दूसरे विकल्प के तौर पर सेबी ने मौजूदा CTS VWAP व्यवस्था को अंतरिम तौर पर जारी रखने का प्रस्ताव रखा है।
इस व्यवस्था में सेटलमेंट प्राइस केवल CTS के आखिरी 30 मिनट में हुए कारोबार के आधार पर तय होगी।
सेबी के मुताबिक, कम से कम एक साल बाद ब्लेंडेड व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जा सकता है। इसके लिए पर्याप्त लिक्विडिटी, बाजार सहभागिता और CAS व्यवस्था से ट्रेडर्स की परिचितता जैसी स्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।
• IIV को हटाने का भी प्रस्ताव
सेबी ने Closing Auction Session के दौरान Indicative Index Value (IIV) के प्रदर्शन को हटाने का प्रस्ताव भी दिया है।
हालांकि, सिक्योरिटी-लेवल Indicative Equilibrium Price (IEP) को जारी रखने का प्रस्ताव है।
नियामक के अनुसार IEP केवल संकेतात्मक और बदलने वाली कीमत है। यह जरूरी नहीं कि उस कीमत पर वास्तव में कोई ट्रेड हुआ हो। सेबी ने कहा कि कुछ बाजार प्रतिभागियों ने IIV का गलत अर्थ निकाला और संकेतात्मक मूल्य के आधार पर पोजीशन लीं।
• बाजार की टाइमिंग में भी बदलाव का प्रस्ताव
सेबी ने केवल एक्सपायरी और सेटलमेंट प्राइस की व्यवस्था में बदलाव की बात नहीं की है, बल्कि Continuous Trading Session और Closing Auction Session की टाइमिंग में बदलाव के दो विकल्प भी सुझाए हैं।
विकल्प A के तहत CAS स्टॉक्स के लिए CTS दोपहर 3:30 बजे तक जारी रखने का प्रस्ताव है। इसके बाद 3:31 बजे से 3:40 बजे तक CAS होगा और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:45 बजे तक जारी रह सकती है।
• विकल्प B में पहले खत्म होगा CTS
दूसरे विकल्प के तहत CTS को दोपहर 3:15 बजे समाप्त करने का प्रस्ताव है।
इसके बाद 3:15 बजे से 3:25 बजे तक CAS चलेगा और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:30 बजे तक जारी रखने का प्रस्ताव है।
दोनों विकल्पों में CTS और CAS के बीच का ट्रांजिशन समय मौजूदा पांच मिनट से घटाकर एक मिनट करने का प्रस्ताव है।
• CAS के बाद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग विंडो होगी छोटी
सेबी ने CAS समाप्त होने के बाद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध विंडो को भी कम करने का प्रस्ताव रखा है।
मौजूदा 10 मिनट की विंडो को घटाकर 5 मिनट करने का प्रस्ताव है। सेबी के मुताबिक, बाजार से मिले फीडबैक में संकेत मिला कि CAS के बाद इतनी छोटी ट्रेडिंग विंडो भी पर्याप्त हो सकती है।
• क्यों जरूरी माने जा रहे हैं ये बदलाव?
सेबी के प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी के समय सेटलमेंट प्राइस को अधिक व्यवस्थित तरीके से निर्धारित करना और CTS तथा CAS के बीच संक्रमण को बेहतर बनाना है।
नियामक ने यह भी संकेत दिया है कि CAS के दौरान दिखाई जाने वाली संकेतात्मक कीमतों को लेकर बाजार सहभागियों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। इसी वजह से IIV को हटाने और सिक्योरिटी-लेवल IEP को बनाए रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
• अभी ये अंतिम नियम नहीं हैं
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये फिलहाल SEBI के प्रस्ताव हैं, अंतिम नियम नहीं। नियामक ने कंसल्टेशन पेपर के जरिए प्रस्तावित बदलावों पर बाजार सहभागियों से प्रतिक्रिया मांगी है।
अंतिम फैसला मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सेटलमेंट प्राइस, CAS, बाजार की टाइमिंग और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग विंडो में प्रस्तावित बदलाव किस रूप में लागू किए जाएंगे।
यानी फिलहाल निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि SEBI ने नियमों में संभावित बदलावों का प्रस्ताव रखा है, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था को अभी अंतिम लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए।
