Action Bharat | नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी का पर्व इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना के बाद अलग-अलग परंपराओं के अनुसार गणपति विसर्जन किया जाता है। डेढ़ दिन वाले गणपति का विसर्जन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा।
• 15 सितंबर को होगा डेढ़ दिन वाले गणपति का विसर्जन
वैदिक पंचांग के अनुसार, डेढ़ दिन वाले गणपति का विसर्जन 15 सितंबर को किया जाएगा। इस दिन अलग-अलग समय पर विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
• गणपति विसर्जन के शुभ मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त: दोपहर 12:26 बजे से 1:58 बजे तक।
अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 3:31 बजे से शाम 5:03 बजे तक।
सायाह्न मुहूर्त: रात 8:03 बजे से 9:31 बजे तक।
रात्रि मुहूर्त: रात 10:59 बजे से 16 सितंबर की सुबह 3:22 बजे तक।
• अन्य शुभ मुहूर्त भी रहेंगे
15 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:44 से 5:41 बजे, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 से 12:51 बजे और विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 से 3:18 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6:35 से 6:59 बजे तक बताया गया है।
• विसर्जन से पहले करें गणपति की पूजा
विसर्जन के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना करने की सलाह दी गई है। गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाने तथा सुख-शांति के लिए प्रार्थना करने की परंपरा बताई गई है।
• विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
गणपति विसर्जन के समय साफ कपड़े पहनने और काले कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी गई है। इसके बाद विधिपूर्वक भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की बात कही गई है।
• वाद-विवाद से बचने की सलाह
गणेश उत्सव के दौरान तामसिक भोजन से बचने और किसी के साथ वाद-विवाद न करने की सलाह दी गई है।
गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का पालन करते हुए गणपति बप्पा को विदाई दे सकते हैं।
