रेक्जाविक। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के लिए पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसे जाने को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफर रगनार ग्रिम्सन ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी एक पुरानी घटना साझा की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में डॉ. कलाम की आइसलैंड यात्रा के दौरान उनके लिए भी पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसा गया था।
ग्रिम्सन वर्ष 1996 से 2016 तक आइसलैंड के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने डॉ. कलाम की आइसलैंड यात्रा की मेजबानी की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि करीब दो दशक पहले, जब भारत के राष्ट्रपति किसी नॉर्डिक देश की पहली यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने स्टेट डिनर में पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू रखा था। उन्होंने खास तौर पर यह भी उल्लेख किया कि उस समय आइसलैंड में शाकाहारी भोजन की व्यवस्था करना आसान नहीं था।
• ब्रिक्स डिनर में परोसे गए भारतीय शाकाहारी व्यंजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के नेताओं के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था। इस दौरान मेहमानों को भारतीय व्यंजनों पर आधारित पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू परोसा गया। इसमें खांडवी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, मिलेट पुलाव, मशरूम गलावटी और जलेबी जैसे व्यंजन शामिल थे।
• कांग्रेस ने उठाया खान-पान की पसंद का मुद्दा
शाकाहारी मेन्यू को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी खान-पान की प्राथमिकताओं को देश और अब विदेशी मेहमानों पर भी थोप रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। उन्होंने इसके साथ छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी ब्रिक्स डिनर के मेन्यू का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए सवाल उठाया कि सरकार ने भारत की खान-पान की विविधता के मांसाहारी हिस्से को क्यों नहीं दिखाया।
• बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए भोजन के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। रिजिजू के मुताबिक, विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया और इन व्यंजनों में विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं के स्वाद और पोषण की झलक थी।
इस पूरे विवाद के बीच आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति की डॉ. कलाम से जुड़ी पुरानी घटना ने यह भी याद दिलाया कि राजकीय आयोजनों में मेजबान देश अक्सर विदेशी मेहमानों की भोजन संबंधी प्राथमिकताओं और परिस्थितियों के अनुरूप मेन्यू तैयार करते हैं।
