नई दिल्ली (Action Bharat) | हिंदू धर्म में संतान सप्तमी का व्रत संतान की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है। इस वर्ष संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। व्रत के साथ पूजा-पाठ से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की भी मान्यता बताई गई है।
संतान सप्तमी पर इन 5 बातों का रखें ध्यान
1. तामसिक भोजन से बचें
व्रत रखने वालों को सात्विक भोजन या फलाहार करने की सलाह दी गई है। इस दिन लहसुन-प्याज सहित तामसिक भोजन से बचने की बात कही गई है।
2. बिना संकल्प के व्रत शुरू न करें
संतान सप्तमी के व्रत में संकल्प को महत्वपूर्ण बताया गया है। व्रत कब तक रखना है और पारण कब करना है, इसका संकल्प उसी अनुसार लेने की बात कही गई है।
3. व्रत कथा का पाठ करें
पूजा के बाद संतान सप्तमी व्रत कथा का पाठ करने, आरती करने और प्रसाद बांटने की बात कही गई है।
4. सात गांठ वाला धागा बांधें
पूजा में सात गांठ वाला धागा अर्पित कर पूजा के बाद हाथ में बांधने की परंपरा बताई गई है। स्रोत में इसे संभव हो तो एक साल और अन्यथा कम से कम सात दिन तक धारण करने की बात कही गई है।
5. कैंची और सुई के इस्तेमाल से बचें
संतान सप्तमी के दिन कैंची, सुई जैसी धारदार चीजों के इस्तेमाल से बचने और कपड़े की सिलाई न करने की सलाह दी गई है।
संतान सप्तमी का धार्मिक महत्व
संतान सप्तमी का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रखा जाता है। स्रोत के अनुसार माताएं संतान की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से यह व्रत रखती हैं तथा इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूजा में सात गांठ वाले धागे के साथ भगवान शिव को सात पूड़ियां और माता पार्वती को सात पूड़ियां भोग लगाने की परंपरा का भी उल्लेख है।
