नई दिल्ली (Action Bharat)। हिंदू विवाह सिर्फ दो लोगों के साथ आने का संस्कार नहीं, बल्कि इसे सोलह संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। विवाह के दौरान वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प लेते हैं।
अग्नि को ही क्यों माना जाता है साक्षी?
हिंदू परंपरा में अग्नि को पवित्रता, ऊर्जा और शुद्धि का प्रतीक माना गया है। वैदिक अनुष्ठानों में अग्नि के माध्यम से देवताओं को आहुति अर्पित करने की परंपरा रही है। इसी वजह से विवाह में अग्नि को साक्षी बनाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पवित्र संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
विवाह मंडप में पंचमहाभूतों की प्रतीकात्मक उपस्थिति भी बताई जाती है—अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश। वर-वधू इन तत्वों को साक्षी मानकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हैं।
सात फेरे क्या संदेश देते हैं?
सात फेरे वर-वधू के बीच साझी जिम्मेदारियों, परिवार, समृद्धि, स्वास्थ्य, प्रेम और जीवनभर साथ निभाने जैसे संकल्पों से जुड़े माने जाते हैं। अलग-अलग वैवाहिक परंपराओं में सात फेरों और सप्तपदी के मंत्रों की व्याख्या में अंतर भी मिलता है।
अग्नि के चारों ओर घूमना इस भावना को दर्शाता है कि विवाह का संकल्प सार्वजनिक और पवित्र साक्षी के सामने लिया जा रहा है।
अग्नि का आध्यात्मिक रहस्य
अग्नि को अशुद्धता और नकारात्मकता को दूर करने वाले तत्व के रूप में देखा जाता है। इसलिए विवाह में अग्नि के सामने लिया गया संकल्प मन, वचन और कर्म से वैवाहिक धर्म निभाने की याद दिलाता है।
Action Bharat का सवाल:
क्या सात फेरे सिर्फ विवाह की रस्म हैं, या पति-पत्नी को जीवनभर अपनी जिम्मेदारियां याद दिलाने वाला एक आध्यात्मिक संकल्प भी हैं?
