कम बारिश और अल नीनो की दोहरी मार, चावल उत्पादन में 1 करोड़ टन तक की कमी का अनुमान

राष्ट्रीय

नई दिल्ली (Action Bharat) | कमजोर मानसून और आने वाले महीनों में अल नीनो के संभावित प्रभाव ने इस साल देश के चावल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। धान की बुवाई का रकबा घटने के साथ फसल तैयार होने के समय नमी की कमी से पैदावार प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है।

कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस साल देश में चावल का उत्पादन करीब 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह पिछले साल के रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन उत्पादन से लगभग 1 करोड़ टन कम होगा।

🌾 धान की खेती का रकबा घटा

मानसून की कमी का सीधा असर धान की खेती पर पड़ा है।

  • पिछले साल धान की बुवाई 445.92 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
  • इस साल यह घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गई।
  • यानी करीब 16.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस बार धान की बुवाई नहीं हुई।
  • रकबे में लगभग 3.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
  • खरीफ धान देश के कुल चावल उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है।

इसलिए धान के रकबे में कमी का असर कुल चावल उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।

🌧️ मानसून में करीब 15 प्रतिशत कमी

इस साल 1 जून से अब तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रही है। कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी इससे भी ज्यादा बताई गई है।

19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान में मानसून की वापसी शुरू हो गई है। ऐसे में धान की फसल के लिए बारिश का प्रमुख दौर लगभग समाप्त माना जा रहा है।

📉 327 जिलों में सामान्य से कम बारिश

आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार:

  • देश के 792 जिलों में से 327 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।
  • इनमें 320 जिलों में बारिश की कमी 20 से 59 प्रतिशत के बीच रही।
  • 7 जिलों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई।

बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के जिले प्रभावित हुए हैं।

🌱 खरीफ की दूसरी फसलें भी प्रभावित

कमजोर मानसून का असर केवल धान तक सीमित नहीं है। इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा भी कम हुआ है।

  • पिछले साल खरीफ रकबा: 1118.95 लाख हेक्टेयर
  • इस साल: 1103.90 लाख हेक्टेयर
  • कुल कमी: करीब 15 लाख हेक्टेयर

मक्का का रकबा 2.23 प्रतिशत और सोयाबीन का 0.72 प्रतिशत घटा है। मूंग के रकबे में भी कमी आई है। वहीं अरहर और उड़द के रकबे में बढ़ोतरी हुई है।

🏪 क्या बढ़ सकती हैं चावल की कीमतें?

उत्पादन में बड़ी गिरावट आने पर बाजार में चावल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। निर्यात की लागत भी बढ़ने की संभावना हो सकती है।

हालांकि, तत्काल आपूर्ति संकट की स्थिति जरूरी नहीं है। सितंबर तक राज्यों के पास सरकारी चावल का भंडार करीब 5.96 करोड़ टन बताया गया है, जो मौजूदा जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त है।

इस वजह से उत्पादन में कमी के बावजूद घरेलू बाजार और चावल के निर्यात पर तत्काल बड़ा असर पड़ना जरूरी नहीं है। हालांकि, आगे कीमतों और उपलब्धता की स्थिति नई फसल के वास्तविक उत्पादन तथा मौसम पर निर्भर करेगी।

Action Bharat | Business Desk

नोट: उत्पादन और कीमतों के आंकड़े कृषि मंत्रालय/मौसम संबंधी उपलब्ध अनुमानों पर आधारित हैं। वास्तविक उत्पादन फसल कटाई के बाद स्पष्ट होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *