नई दिल्ली (Action Bharat) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को लेकर प्रकाशित एक विश्लेषण में प्रशासनिक कामकाज, डिजिटल सेवाओं, वित्तीय समावेशन, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं में हुए बदलावों का आकलन किया गया है। यह विश्लेषण लेखक प्रेम शंकर झा ने किया है और इसमें सरकार की नीतियों तथा सरकारी आंकड़ों के आधार पर ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’ की अवधारणा को समझाने की कोशिश की गई है।
डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन पर जोर
विश्लेषण में जनधन, आधार और मोबाइल को सरकार और नागरिक के बीच वित्तीय लेनदेन में बदलाव की प्रमुख कड़ी बताया गया है।
- 9 सितंबर 2026 तक PMJDY के तहत 59.26 करोड़ लाभार्थी दर्ज हैं।
- खातों में कुल जमा राशि करीब ₹3.17 लाख करोड़ बताई गई है।
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार महिला लाभार्थियों की संख्या करीब 33.02 करोड़ है। (PM Jan-Dhan Yojana)
UPI के विस्तार को भी डिजिटल प्रशासन और भुगतान व्यवस्था में बदलाव के उदाहरण के रूप में पेश किया गया है। NPCI के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29.82 लाख करोड़ रहा। (NPCI)
प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग से इंफ्रास्ट्रक्चर तक
लेख में प्रगति मंच और पीएम गति शक्ति को प्रशासन में निगरानी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने वाली व्यवस्थाओं के रूप में रेखांकित किया गया है।
इसी के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेन, अमृत भारत स्टेशन और क्षेत्रीय हवाई संपर्क जैसी परियोजनाओं को पिछले 12 वर्षों की आधारभूत संरचना नीति के प्रमुख हिस्सों के रूप में बताया गया है।
कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
विश्लेषण में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, खाद्य सुरक्षा और जनधन जैसी योजनाओं के जरिए औपचारिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की बात कही गई है।
साथ ही लेख यह भी रेखांकित करता है कि किसी योजना का मूल्यांकन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता और वास्तविक उपयोग के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
रोजगार, स्टार्टअप और विनिर्माण
लेख में स्टार्टअप इंडिया, कौशल विकास, अटल इनोवेशन मिशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को युवाओं के लिए नीति के प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर बताया गया है।
विनिर्माण क्षेत्र में GST, IBC और Production Linked Incentive (PLI) जैसी नीतियों का उल्लेख किया गया है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 2026 तक 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी और ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक संभावित निवेश का आंकड़ा भी लेख में दिया गया है।
12 साल बाद अगली चुनौती क्या?
विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उपलब्धियों के साथ-साथ आगे की चुनौतियों पर भी केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि सड़क, डिजिटल प्लेटफॉर्म या बैंक खाते बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन रखरखाव, स्थानीय संस्थाओं की क्षमता, शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता, रोजगार और नागरिक सेवाओं की समान पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए लेख के अनुसार अगले चरण में सवाल केवल योजनाओं और परियोजनाओं की संख्या का नहीं, बल्कि इन बदलावों को स्थायी संस्थागत व्यवस्था में बदलने का होगा।
Action Bharat की नजर में
यह रिपोर्ट मूल रूप से एक नीतिगत/विश्लेषणात्मक लेख पर आधारित है, इसलिए इसमें सरकार के पिछले 12 वर्षों के कामकाज का सकारात्मक पक्ष प्रमुखता से सामने आता है। लेख में स्वयं यह भी कहा गया है कि अंतिम मूल्यांकन के लिए योजनाओं की संख्या के साथ उनकी गुणवत्ता, प्रभाव और संस्थागत स्थायित्व को देखना जरूरी है। (Jagran)
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