नई दिल्ली (Action Bharat) | हिंदू अंतिम संस्कार की परंपराओं में मृतक के पैरों के अंगूठों को धागे से बांधने की प्रथा का उल्लेख मिलता है। गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा और शरीर के संबंध तथा अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर कई धार्मिक अवधारणाएं बताई गई हैं।
🕉️ पैरों के अंगूठे बांधने की क्या मान्यता है?
गरुड़ पुराण के अनुसार बताई गई मान्यता में कहा गया है कि मृत्यु के बाद मृतक के दोनों पैरों के अंगूठों को बांधा जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आत्मा दोबारा शरीर में प्रवेश न कर सके। मान्यता यह भी बताती है कि मृत्यु के बाद आत्मा का अपने शरीर से मोह बना रह सकता है।
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंगूठे बांधने का संबंध शरीर को स्थिर रखने से भी जोड़ा जाता है। लेख में यह भी कहा गया है कि आत्मा के शरीर से निकलने के बाद शरीर को बाहरी नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए सूक्ष्म ऊर्जा द्वार बंद रखने की धार्मिक अवधारणा है।
🪔 अंतिम संस्कार में अपनाई जाती हैं कई परंपराएं
धार्मिक विधि के अनुसार मृत्यु के बाद शव को जमीन पर लिटाया जाता है और सिर दक्षिण दिशा की ओर रखने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद मुख में गंगाजल, तुलसी का पत्ता और स्वर्ण रखने, शव को स्नान कराने तथा नए वस्त्र पहनाने जैसी परंपराओं का उल्लेख मिलता है।
इसके बाद बांस और कुश घास से अर्थी तैयार की जाती है। शव को अर्थी पर रखकर कफन से ढका जाता है और अंतिम यात्रा के दौरान शरीर को सुरक्षित रखने के लिए सूत के धागों से अर्थी के साथ बांधने की परंपरा भी बताई गई है।
📌 धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक तथ्य अलग-अलग विषय हैं
पैरों के अंगूठे बांधने से जुड़ी उपरोक्त बातें गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
Action Bharat | Spiritual Desk
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