लखनऊ (Action Bharat) | उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक 25 सितंबर को लखनऊ में प्रस्तावित है। बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा के साथ-साथ संगठन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार होने की संभावना है।
10 राज्यसभा और 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। वहीं, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी।
इन चुनावों के लिए भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में भी दावेदारों के नामों पर पहले दो दौर की चर्चा हो चुकी है। अब लखनऊ की बैठक में प्रदेश स्तर पर विचार-विमर्श के बाद नामों को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
कोर कमेटी की बैठक में ये नेता रहेंगे मौजूद
रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में होने वाली बैठक में प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इनमें—
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
- उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
- प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी
- प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह
के शामिल होने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अपने चारों सह-प्रभारियों के साथ बैठक में शामिल हो सकते हैं।
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में क्या होगा फोकस?
पार्टी पदाधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में जातीय समीकरण के साथ पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी प्राथमिकता देने पर विचार किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में फिलहाल भाजपा के आठ सदस्य हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर विभिन्न रिपोर्टों में भाजपा के आठ सीटों पर पहुंचने की संभावना का आकलन किया गया है, हालांकि अंतिम परिणाम मतदान और चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा।
विधान परिषद चुनाव में शिक्षक और स्नातक सीटों पर नजर
विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई क्षेत्रों में शिक्षक संगठनों से जुड़े पुराने नेताओं ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
ऐसे में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों के बीच टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की प्रक्रिया के बाद होगा।
निगम, बोर्ड और आयोग के पदों पर भी चर्चा
25 सितंबर की बैठक में केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव ही चर्चा का विषय नहीं होंगे। रिपोर्ट के अनुसार निगम, बोर्ड और विभिन्न आयोगों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी नामों पर विचार किया जाएगा।
विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में पार्टी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी देने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की परीक्षा
राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों का कार्यक्रम ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसलिए इन चुनावों को राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक तैयारी और विधायी संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि चुनावों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग दलों और विश्लेषकों की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। फिलहाल भाजपा के लिए तत्काल फोकस प्रत्याशियों के चयन और चुनावी प्रक्रिया की तैयारी पर है।
Action Bharat | Political Desk
