नई दिल्ली (Action Bharat) | चुनावी राजनीति में सांसदों और विधायकों के दल बदलने को लेकर Association for Democratic Reforms (ADR) और National Election Watch (NEW) की नई रिपोर्ट सामने आई है। 24 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2026 के बीच 111 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने चुनाव जीतने के बाद अपना राजनीतिक दल बदला। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं।
ADR ने यह विश्लेषण 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामने आए मामलों के आधार पर किया है। संगठन ने यह भी कहा है कि देश में दल-बदल से संबंधित कोई व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध केंद्रीकृत आधिकारिक डेटा नहीं है, इसलिए यह सूची पूरी तरह exhaustive होने की गारंटी नहीं देती।
नागालैंड में सबसे ज्यादा मामले
रिपोर्ट के अनुसार, दल बदलने के सबसे ज्यादा 32 मामले नागालैंड में सामने आए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20, तेलंगाना में 9, गोवा और पंजाब में 8-8 तथा महाराष्ट्र और मेघालय में 6-6 मामले दर्ज किए गए।
मणिपुर में 5, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात में 4-4, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में 2-2 तथा कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 1-1 मामला दर्ज किया गया।
किन दलों में शामिल हुए नेता?
ADR के अनुसार, 111 जनप्रतिनिधियों में से सबसे ज्यादा 32 नेता NPF में शामिल हुए। इसके बाद 29 BJP, 20 Nationalist Citizens Party of India, 9 कांग्रेस, 8 शिवसेना, 6 NPP और 4 PPA में शामिल हुए।
BJP में शामिल हुए 29 जनप्रतिनिधियों में 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक शामिल थे। ADR की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में कोई लोकसभा सांसद BJP में शामिल नहीं हुआ।
किन दलों से सबसे ज्यादा नेता निकले?
रिपोर्ट में जिन पार्टियों से सबसे अधिक जनप्रतिनिधियों के जाने का उल्लेख है, उनमें—
- NDPP — 25
- AITC — 20
- कांग्रेस — 19
- BRS — 9
- AAP — 7
- NCP — 7
- शिवसेना (UBT) — 6
- JD(U) — 5
शामिल हैं। NDPP, AITC और कांग्रेस से जाने वाले जनप्रतिनिधियों की संख्या मिलाकर 64 यानी कुल मामलों का 58 प्रतिशत थी।
हर दल-बदल एक जैसा नहीं
ADR ने 111 मामलों को एक ही तरह का दलबदल नहीं माना है। रिपोर्ट में इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है—
- Individual switch/defection — विधायक या सांसद ने बिना सदन से इस्तीफा दिए दूसरा दल ज्वाइन किया।
- Party merger — मूल राजनीतिक दल या उसके बड़े हिस्से का दूसरे दल में विलय।
- Resignation + Bye-election — पद से इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल होना और फिर उपचुनाव जीतना।
- Disqualification + Bye-election — दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल होकर उपचुनाव जीतना।
ADR ने डेटा को लेकर दी सावधानी
ADR और NEW ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर हर संभव मामले को शामिल करने का प्रयास किया गया है, लेकिन व्यवस्थित आधिकारिक डेटा की कमी के कारण कुछ मामले रिपोर्ट में शामिल नहीं हो पाए हो सकते हैं।
इसलिए रिपोर्ट के आंकड़े ADR और NEW द्वारा किए गए विश्लेषण के रूप में देखे जाने चाहिए, न कि देश में दल-बदल के मामलों का सरकारी अंतिम आंकड़ा।
स्रोत: Association for Democratic Reforms (ADR) एवं National Election Watch
