नई दिल्ली, Action Bharat | दिल्ली हाई कोर्ट ने दृष्टि IAS के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति से जुड़ी डीपफेक और नकल करने वाली ऑनलाइन सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश विकास दिव्यकीर्ति की ओर से दायर व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर इंस्टाग्राम पर विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल और उनकी नकल करने वाली रील्स प्रसारित की जा रही हैं। याचिका में कहा गया कि ऐसी सामग्री से उनकी छवि और व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
बिना अनुमति डीपफेक सामग्री बनाने का आरोप
विकास दिव्यकीर्ति की ओर से अदालत में कहा गया कि उनकी अनुमति के बिना उनकी तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल करके डीपफेक सामग्री तैयार की जा रही है और उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। इसके साथ ही कॉपीराइट उल्लंघन का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया।
अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
मेटा ने 13 URL का दिया संदर्भ
सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से अदालत को बताया गया कि आपत्तिजनक 13 URL में से 11 इंस्टाग्राम रील्स से संबंधित हैं। मेटा की ओर से इन सामग्री को हटाने के संबंध में कार्रवाई की बात कही गई।
मामले में गलत जानकारी और विकास दिव्यकीर्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाली ऑनलाइन सामग्री को लेकर भी चर्चा हुई।
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल का मामला
यह मामला सोशल मीडिया पर सार्वजनिक व्यक्तियों की तस्वीरों और पहचान का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़ा है। याचिका में ऐसे कंटेंट को हटाने और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल और आपत्तिजनक रील्स को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत के विस्तृत आदेश से मामले में कानूनी स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
