डेमोग्राफी कमेटी का बड़ा कदम, राज्यों से मांगा पिछले 15 साल का जिलावार धार्मिक आबादी का डेटा

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नई दिल्ली (Action Bharat) | केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत गठित ‘जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति’ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पिछले 15 वर्षों में धार्मिक आबादी में हुए बदलावों का जिलावार डेटा मांगा है।

समिति ने जिलों, औद्योगिक क्लस्टरों और सीमावर्ती जिलों में आबादी में हुए बदलावों से संबंधित जानकारी मांगी है। इसके साथ ही 2011 से आदिवासी आबादी की धार्मिक संरचना का डेटा भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वर्षों के अनुसार बदलाव दिखाने वाला डेटा देने के साथ-साथ आबादी में हुए बड़े बदलावों पर उनका आकलन भी मांगा गया है। समिति ने कहा है कि जहां तक संभव हो, आंकड़े जिलों के सरकारी रिकॉर्ड से जुटाए जाएं।

जन्म पंजीकरण का भी मांगा गया डेटा

सूत्रों के अनुसार, राज्यों से पिछले 15 वर्षों के धर्मवार और जिलावार जन्म पंजीकरण का डेटा मांगा गया है। इसके अलावा 21 दिन की कानूनी समयसीमा के बाद हुए जन्म पंजीकरण, संदिग्ध धोखाधड़ी के मामलों और संस्थागत व गैर-संस्थागत जन्मों की जानकारी भी मांगी गई है।

समिति ने मंदिर, मस्जिद, चर्च सहित धार्मिक ढांचों से जुड़े सरकारी सर्वेक्षणों की जानकारी भी मांगी है। इसके अलावा आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड के नामांकन में अचानक हुए बदलावों से संबंधित जानकारी मांगी गई है।

सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों पर भी नजर

राज्यों से परिवहन विभाग के धर्मवार वाहन पंजीकरण आंकड़े, सीमावर्ती जिलों में व्यावसायिक वाहन लाइसेंस में अचानक बढ़ोतरी और आदिवासी क्षेत्रों में संपत्ति हस्तांतरण के पैटर्न की जानकारी मांगी गई है।

आदिवासी जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और कब्जे से जुड़े आंकड़ों के साथ पिछले 15 वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों में बने सरकारी, सहायता-प्राप्त और निजी धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों की जानकारी भी मांगी गई है।

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार कई राज्यों में धर्म के आधार पर इस तरह का विस्तृत डेटा नियमित रूप से एकत्र नहीं किया जाता। समिति ने स्पष्ट किया है कि जो डेटा उपलब्ध नहीं है, राज्यों को उसे उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में आबादी में बदलाव के पैटर्न का अध्ययन करने के लिए अन्य तरीकों पर विचार किया जा सकता है।

सरकार के अनुसार, समिति आगे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर जमीनी स्तर की जानकारी जुटाएगी और संबंधित विषयों पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से भी बातचीत करेगी।

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