नई दिल्ली (Action Bharat) | जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की सलामती, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाने वाला प्रमुख व्रत है। इस वर्ष जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में यह पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है।
जितिया व्रत में पूजा और उपवास के साथ जिउतिया लॉकेट धारण करने की भी परंपरा बताई जाती है। इसे आमतौर पर लाल या पीले रंग के धागे में पिरोकर पहना जाता है।
जिउतिया लॉकेट का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिउतिया लॉकेट मां की ममता, आस्था और संतान की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। लॉकेट में भगवान जीमूतवाहन की आकृति अंकित होने की परंपरा बताई जाती है।
लॉकेट सोने या चांदी का हो सकता है और इसे लाल या पीले धागे के साथ धारण किया जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
जिउतिया लॉकेट पहनने की परंपरा
जिन माताओं की दो या तीन संतान होती हैं, वे परंपरा के अनुसार बच्चों के लिए अलग-अलग लॉकेट एक ही धागे में पिरोकर धारण करती हैं।
पूजा पूरी होने के बाद कुछ परंपराओं में पहले बच्चों को यह धागा पहनाया जाता है और उसके बाद मां स्वयं इसे धारण करती हैं। इसे मां और संतान के बीच स्नेह और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।
नोट: जिउतिया लॉकेट से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे धारण करने की परंपरा अलग हो सकती है।
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