नई दिल्ली (Action Bharat) | सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी गई थी। इन खातों में करीब ₹804 करोड़ होने की जानकारी सामने आई है। (The Economic Times)
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहा है और हाईकोर्ट से लंबित मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया। (The Economic Times)
क्या है मामला?
चार बैंक खाते पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के बाद डेबिट-फ्रीज किए गए थे। TMC की ओर से दलील दी गई थी कि खातों को फ्रीज करने के आधार में इस्तेमाल FIR में प्रक्रियागत कमियां हैं। 27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी इन खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया था। (The New Indian Express)
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद लंबित है। अदालत के अनुसार, इन खातों में मौजूद धन पर किस पक्ष का अधिकार है, यह सवाल भी अभी विचाराधीन है। (telegraphindia.com)
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। हाईकोर्ट को सुनवाई तेज करने के निर्देश के साथ याचिका का निपटारा किया गया है। (The Economic Times)
#ActionBharat #TMC #MamataBanerjee #SupremeCourt #CalcuttaHighCourt #BankAccounts #WestBengal #IndianPolitics #BreakingNews #NationalNews
