नई दिल्ली (Action Bharat) | मानसून की भारी बारिश के बावजूद दिल्ली की हवा पूरी तरह साफ नहीं हो सकी। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के आकलन के मुताबिक, जून से अगस्त के 92 दिनों में सिर्फ एक दिन वायु गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में रही।
CSE के अनुसार, मानसून के दौरान दिल्ली में कुल 576.9 मिमी बारिश हुई। बारिश के दौरान PM2.5 का औसत स्तर घटकर 32.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, लेकिन बारिश रुकने के बाद प्रदूषण दोबारा बढ़ गया।
आंकड़ों के मुताबिक, बारिश से पहले PM2.5 का औसत स्तर 40.6 माइक्रोग्राम था। बारिश के दौरान यह घटकर 32.7 माइक्रोग्राम हुआ, लेकिन 24 घंटे बाद बढ़कर 36.2 और 48 घंटे बाद 45.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। यानी 48 घंटे में बारिश के दौरान के स्तर से PM2.5 में 37.9% की वृद्धि दर्ज हुई।
मानसून के दौरान 53 दिन ‘मध्यम’, 35 दिन ‘संतोषजनक’, तीन दिन ‘खराब’ और सिर्फ एक दिन ‘अच्छी’ वायु गुणवत्ता रही। CSE के मुताबिक बारिश कण प्रदूषण को कुछ समय के लिए कम करती है, लेकिन गैसीय प्रदूषक वातावरण में बने रह सकते हैं। मानसून के 20 दिनों में जमीन के करीब बनने वाली ओजोन प्रमुख प्रदूषक रही।
CSE ने प्रदूषण से निपटने के लिए पूरे NCR में सालभर उत्सर्जन कम करने की जरूरत बताई है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण, स्वच्छ औद्योगिक ईंधन, खुले में कचरा जलाने पर रोक और निर्माण कचरे के बेहतर प्रबंधन जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।
PM2.5 का स्तर:
🔹 बारिश से पहले: 40.6 µg/m³
🔹 बारिश के दौरान: 32.7 µg/m³
🔹 24 घंटे बाद: 36.2 µg/m³
🔹 48 घंटे बाद: 45.1 µg/m³
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