नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने सात और बस डिपो में ई-बस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर कुल 300.61 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में दिल्ली के सार्वजनिक बस बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या तेजी से बढ़ाना है।
सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित डीटीसी और क्लस्टर बस डिपो में तैयार किया जाएगा। इन सुविधाओं का उद्देश्य डिपो में बढ़ती ई-बसों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त चार्जिंग क्षमता उपलब्ध कराना है।
इन 7 बस डिपो में विकसित होगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रस्तावित परियोजना के तहत दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के निम्न क्षेत्रों में स्थित बस डिपो को चार्जिंग सुविधाओं से लैस किया जाएगा—
- दिचाऊं कलां
- कैर
- खरखरी नहर
- घुमनहेड़ा क्षेत्र के डीटीसी और क्लस्टर बस डिपो
इन डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। परियोजना की योजना बनाते समय डिपो की बिजली संबंधी जरूरतों और आसपास के बिजली नेटवर्क को भी ध्यान में रखा जाएगा।
300.61 करोड़ रुपये की परियोजना, दो वित्तीय वर्षों में होगा खर्च
सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 300.61 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें से करीब 40 प्रतिशत राशि चालू वित्त वर्ष में खर्च किए जाने की योजना है।
बजट का विवरण
- चालू वित्त वर्ष: 120.25 करोड़ रुपये
- अगले वित्त वर्ष: 180.36 करोड़ रुपये
- कुल परियोजना लागत: 300.61 करोड़ रुपये
चालू वित्त वर्ष में जारी होने वाली राशि बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम को दी जाएगी। इसके माध्यम से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवश्यक बिजली आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
18 महीने में पूरा होने की उम्मीद
दिल्ली सरकार की वित्त एवं व्यय समिति की बैठक में सातों बस डिपो में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
सभी जरूरी प्रशासनिक और अन्य मंजूरियां मिलने के बाद परियोजना का काम लगभग 18 महीने में पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
इस परियोजना में केवल चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करना ही शामिल नहीं होगा, बल्कि ई-बसों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
बिजली ग्रिड और डिपो की दूरी का रखा जाएगा ध्यान
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का डिजाइन तैयार करते समय एक महत्वपूर्ण पहलू डिस्कॉम के बिजली ग्रिड और बस डिपो के बीच की दूरी होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ई-बसों को चार्ज करने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो और भविष्य में चार्जिंग क्षमता बढ़ाने में भी तकनीकी बाधाएं कम रहें।
सरकार की योजना में इस बात पर भी जोर है कि चार्जिंग व्यवस्था के कारण ई-बसों के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए।
2029 तक 14 हजार ई-बसें शामिल करने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने वर्ष 2029 तक सार्वजनिक बस बेड़े में 14 हजार ई-बसें शामिल करने की योजना बनाई है। इसके लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके संचालन के लिए पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करना जरूरी होगा।
इसी को ध्यान में रखते हुए राजधानी के अलग-अलग बस डिपो में चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
दिल्ली में 50 से अधिक बस डिपो
राजधानी में वर्तमान में 50 से अधिक बस डिपो हैं। भविष्य में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें शामिल किए जाने को देखते हुए इन डिपो में चार्जिंग व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बढ़ रही है।
दिल्ली परिवहन विभाग पहले से ही बस डिपो में चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। सात नए डिपो में प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर इसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
डीटीसी के बेड़े में 5 हजार से अधिक ई-बसें
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के बेड़े में वर्तमान में 5,000 से अधिक ई-बसें चल रही हैं।
ई-बसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ डिपो में चार्जिंग की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में नए चार्जिंग स्टेशन विकसित करना सार्वजनिक परिवहन के इलेक्ट्रिफिकेशन की योजना का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
ई-बसों के संचालन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने की योजना के साथ अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी उसी अनुपात में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सात डिपो में प्रस्तावित परियोजना के जरिए—
- ई-बसों के लिए अतिरिक्त चार्जिंग क्षमता तैयार होगी।
- बस डिपो में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
- डिस्कॉम के ग्रिड और डिपो के बीच आवश्यक कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी।
- भविष्य में बढ़ने वाली ई-बसों की संख्या के अनुरूप चार्जिंग व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी।
- सार्वजनिक परिवहन के इलेक्ट्रिक बेड़े के विस्तार को आधारभूत ढांचा मिलेगा।
दिल्ली सरकार की 2029 तक 14 हजार ई-बसें शामिल करने की योजना को देखते हुए आने वाले समय में राजधानी के अन्य बस डिपो में भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत होगी।
Action Bharat | Delhi Desk
