वॉशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिका ने नेवादा नेशनल सिक्योरिटी साइट पर जमीन के नीचे गैर-परमाणु रासायनिक विस्फोटक परीक्षण किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, इसका उद्देश्य कम क्षमता वाले परमाणु विस्फोटों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने की तकनीक को बेहतर बनाना है।
अमेरिकी राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) ने यह परीक्षण एरिया-12 की पी टनल में किया। इसमें रासायनिक हाई-एक्सप्लोसिव और रेडियोट्रेसर का इस्तेमाल किया गया। परीक्षण से जुटाए गए डेटा के जरिए वैज्ञानिक मॉडल की जांच और परमाणु विस्फोटों की पहचान करने वाले एल्गोरिदम को बेहतर बनाने की योजना है।
चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण का आरोप
यह परीक्षण चीन की कथित परमाणु गतिविधियों को लेकर अमेरिका की चिंताओं के बीच हुआ है। वॉशिंगटन ने चीन पर जून 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उस परीक्षण में ऐसे तरीके अपनाए गए, जिनसे भूकंपीय संकेतों का पता लगाना मुश्किल हो सकता था।
चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। बीजिंग का कहना है कि अमेरिका इन आरोपों का इस्तेमाल अपने परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के लिए बहाने के तौर पर कर रहा है।
परमाणु निगरानी पर बढ़ती चिंता
परमाणु विस्फोटों की पहचान और निगरानी को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव के बीच अमेरिका ने हथियार नियंत्रण से जुड़ी व्यापक संधि की भी मांग की है। हालांकि, नेवादा में किया गया हालिया परीक्षण गैर-परमाणु विस्फोटक परीक्षण था; इसे परमाणु हथियार का परीक्षण नहीं बताया गया है।
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