PPF में 7.1% ब्याज और टैक्स लाभ, जानें निवेश की सीमा और 15 साल की अवधि

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नई दिल्ली (Action Bharat) | सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश की तलाश करने वाले लोगों के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक विकल्प है। इस योजना में सरकार की ओर से निर्धारित ब्याज मिलता है और निवेश पर आयकर लाभ भी उपलब्ध है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ की ब्याज दर 7.1 प्रतिशत बरकरार रखी गई है।

₹500 से शुरू कर सकते हैं निवेश

पीपीएफ खाते में एक वित्त वर्ष के दौरान न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख जमा किए जा सकते हैं। खाताधारक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर रकम जमा कर सकते हैं। इसमें चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है, यानी जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी आगे ब्याज अर्जित करता है।

15 साल में होती है परिपक्वता

पीपीएफ खाते की सामान्य परिपक्वता अवधि 15 वर्ष है। इसके बाद खाताधारक पांच-पांच साल के ब्लॉक में खाते को आगे बढ़ा सकते हैं। खाते को आगे बढ़ाते समय निर्धारित नियमों के अनुसार उसमें नया निवेश किया जा सकता है या बिना अतिरिक्त जमा के भी जारी रखा जा सकता है।

टैक्स में मिल सकता है लाभ

पीपीएफ में किए गए निवेश पर पुरानी कर व्यवस्था के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80C के अनुसार निर्धारित सीमा तक कटौती का लाभ मिल सकता है। खाते पर मिलने वाला ब्याज और परिपक्वता राशि भी मौजूदा नियमों के तहत कर-मुक्त हैं। नई कर व्यवस्था में धारा 80C की कटौती उपलब्ध नहीं होती।

खाते पर लोन और आंशिक निकासी की सुविधा

पीपीएफ खाताधारकों को खाता खोलने के बाद तीसरे से छठे वित्त वर्ष के बीच निर्धारित शर्तों के अनुसार लोन लेने की सुविधा मिलती है। वहीं, पांच वित्त वर्ष पूरे होने के बाद नियमों के मुताबिक आंशिक निकासी की जा सकती है। खाता अधिसूचित बैंकों और डाकघरों में खोला जा सकता है।

नाबालिग के नाम पर भी खुल सकता है खाता

भारतीय निवासी नाबालिग के नाम पर भी अभिभावक पीपीएफ खाता खोल सकते हैं और उसके 18 वर्ष का होने तक खाते का संचालन कर सकते हैं। नाबालिग की ओर से अभिभावक खाते में निवेश कर सकते हैं। खाता खोलते समय नामांकन कराने का विकल्प भी उपलब्ध है।

पीपीएफ लंबी अवधि की बचत के लिए बनाया गया विकल्प है। इसमें निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, पैसे की उपलब्धता, लॉक-इन अवधि और लागू कर व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है। ब्याज दर सरकार द्वारा समय-समय पर तय की जाती है, इसलिए भविष्य की दर बदल सकती है।

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