बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आज भारत के बाइक बाजार में हीरो, होंडा, बजाज और टीवीएस जैसे कई बड़े नाम हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में मोटरसाइकिल निर्माण की शुरुआत करने वाले शुरुआती प्रमुख ब्रांडों में रॉयल एनफील्ड का नाम सबसे खास रहा है? इसकी कहानी करीब सात दशक से भी ज्यादा पुरानी है।
आज जिस रॉयल एनफील्ड बुलेट को उसकी दमदार आवाज, भारी-भरकम डिजाइन और मजबूत इंजन के लिए जाना जाता है, उसकी भारत में लोकप्रियता की शुरुआत किसी शहर की सड़कों से नहीं बल्कि भारतीय सेना की जरूरत से हुई थी।
1952 में भारतीय सेना ने बॉर्डर पेट्रोलिंग के लिए बुलेट 350 को चुना। इसके बाद इस बाइक की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और देखते ही देखते यह सेना से निकलकर आम भारतीयों की पसंद बन गई।
ब्रिटेन में 1901 में हुई थी शुरुआत
रॉयल एनफील्ड की शुरुआत भारत में नहीं बल्कि ब्रिटेन में हुई थी। कंपनी की स्थापना 1901 में हुई थी। उस दौर में भारत अभी ब्रिटिश शासन के अधीन था और मोटरसाइकिलों का बाजार आज की तरह विकसित नहीं था।
आजादी के बाद भारत में मजबूत और भरोसेमंद मोटरसाइकिलों की जरूरत बढ़ने लगी। खासकर भारतीय सेना को ऐसी बाइक की आवश्यकता थी जो कठिन इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के काम आ सके।
यहीं से भारत में रॉयल एनफील्ड बुलेट की कहानी शुरू हुई।
1952 में भारतीय सेना ने दिया 800 बुलेट का ऑर्डर
साल 1952 में भारतीय सेना ने बॉर्डर पेट्रोलिंग के लिए रॉयल एनफील्ड Bullet 350 को चुना। सेना की जरूरत को देखते हुए कंपनी को शुरुआती तौर पर 800 मोटरसाइकिलों का ऑर्डर दिया गया।
बुलेट की मजबूती और कठिन परिस्थितियों में चलने की क्षमता ने इसे सेना के लिए उपयोगी बनाया। सेना के इस्तेमाल के कारण भी इस मोटरसाइकिल की पहचान आम लोगों के बीच तेजी से बनी।
यही वह दौर था जब बुलेट केवल एक मोटरसाइकिल नहीं बल्कि मजबूती और भरोसे का प्रतीक बनने लगी।
1955 में मद्रास मोटर्स के साथ हुआ बड़ा करार
भारत में बुलेट की मांग बढ़ने के बाद रॉयल एनफील्ड ने 1955 में मद्रास मोटर्स के साथ समझौता किया।
दोनों कंपनियों ने मिलकर ‘एनफील्ड इंडिया’ नाम की कंपनी बनाई। इसके बाद भारत में ही रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।
तमिलनाडु के तिरुवोट्टियूर में इसका कारखाना स्थापित किया गया, जहां बुलेट का निर्माण और असेंबलिंग शुरू हुई।
पहले ब्रिटेन से आते थे पार्ट्स, फिर भारत में बनने लगी पूरी बाइक
शुरुआती दौर में भारत में तैयार होने वाली बुलेट के कई पार्ट्स ब्रिटेन से मंगाए जाते थे। भारत में इन पार्ट्स को असेंबल किया जाता था।
लेकिन समय के साथ भारतीय उत्पादन क्षमता बढ़ती गई। 1960 के दशक तक बुलेट के लगभग सभी प्रमुख पार्ट्स का निर्माण भारत में ही होने लगा।
इस तरह रॉयल एनफील्ड का भारतीयकरण धीरे-धीरे मजबूत होता गया और देश में इसकी अपनी मैन्युफैक्चरिंग पहचान बन गई।
ब्रिटेन में कंपनी बंद हुई, भारत में बुलेट चलती रही
रॉयल एनफील्ड की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि जिस ब्रांड का जन्म ब्रिटेन में हुआ था, उसका भविष्य आखिरकार भारत में ज्यादा मजबूत हुआ।
ब्रिटेन में जापानी कंपनियों Honda और Yamaha की हल्की और अपेक्षाकृत सस्ती मोटरसाइकिलों ने बाजार में जगह बनानी शुरू कर दी। रॉयल एनफील्ड जैसी भारी मोटरसाइकिलों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल होती गई।
आखिरकार ब्रिटेन में रॉयल एनफील्ड का उत्पादन बंद हो गया और 1970 में ब्रिटेन की फैक्ट्री भी पूरी तरह बंद हो गई।
लेकिन भारत में बुलेट का सफर जारी रहा।
1994 में आइशर मोटर्स ने संभाली कमान
भारत में भी रॉयल एनफील्ड का कारोबार एक समय मुश्किल दौर से गुजर रहा था। तभी 1994 में आइशर मोटर्स ने रॉयल एनफील्ड का अधिग्रहण किया।
इसके बाद कंपनी को नए तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिशें शुरू हुईं।
साल 2000 में सिद्धार्थ लाल ने कंपनी की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद रॉयल एनफील्ड के ब्रांड और उत्पाद रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले।
कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी पहचान को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ा, लेकिन बाइक की मूल पहचान—क्लासिक डिजाइन, भारी बनावट और दमदार राइडिंग अनुभव—को बरकरार रखा।
सेना से शुरू हुआ सफर युवाओं की पसंद तक पहुंचा
जिस बुलेट को कभी सीमावर्ती इलाकों में सेना की पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वही आगे चलकर भारत के शहरों, कस्बों और गांवों की सड़कों पर भी दिखाई देने लगी।
समय के साथ रॉयल एनफील्ड ने खुद को केवल एक उपयोगी मोटरसाइकिल के बजाय एक लाइफस्टाइल और राइडिंग ब्रांड के तौर पर स्थापित किया।
आज भी बुलेट और रॉयल एनफील्ड का नाम भारतीय मोटरसाइकिल संस्कृति में अलग पहचान रखता है।
74 साल पुरानी कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़
रॉयल एनफील्ड की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसका जन्म ब्रिटेन में हुआ, लेकिन इसकी सबसे मजबूत विरासत भारत में बनी।
1901 में ब्रिटेन में शुरुआत → 1952 में भारतीय सेना के लिए बुलेट → 1955 में भारत में निर्माण → 1960 के दशक में स्थानीय उत्पादन → 1970 में ब्रिटेन का उत्पादन बंद → 1994 में आइशर मोटर्स का अधिग्रहण → 2000 के बाद नए दौर में वापसी।
यानी जिस ब्रांड का ब्रिटेन में सफर खत्म हो गया, उसी ब्रांड ने भारत में अपनी जड़ें इतनी मजबूत कर लीं कि आज रॉयल एनफील्ड भारतीय मोटरसाइकिल बाजार की सबसे पहचान वाली विरासतों में से एक बन चुकी है।
