दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, राजस्व विभाग और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने कुल 456 स्थानों की पहचान की थी, जिनमें से 382 स्थलों को मंत्रालय की स्वीकृति मिली है।
बिजली ग्रिड की क्षमता के आधार पर हुआ मूल्यांकन
सरकार ने पिछले तीन महीनों में सभी चिन्हित स्थलों का दोबारा मूल्यांकन किया। इसमें यह निर्धारित किया गया कि किस स्थान पर दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए किस प्रकार की चार्जिंग सुविधा उपयुक्त होगी।
इस प्रक्रिया में बिजली की उपलब्धता और ग्रिड की क्षमता को भी ध्यान में रखा गया है, ताकि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बावजूद चार्जिंग सुविधाओं पर दबाव न पड़े।
परियोजना में KPMG की भी भूमिका
परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सरकार ने KPMG को परियोजना प्रबंधन इकाई के रूप में शामिल किया है। सभी 382 स्थलों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है और अब टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
2027 और 2028 के लक्ष्यों को लेकर तैयारी
सरकार के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से तिपहिया और हल्के व्यावसायिक वाहनों तथा 1 अप्रैल 2028 से दोपहिया वाहनों के लिए 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ऐसे में दिल्ली में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इलेक्ट्रिक वाहन नीति को जमीन पर उतारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि टेंडर प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और राजधानी के अलग-अलग इलाकों में ये चार्जिंग स्टेशन कब तक आम लोगों के लिए उपलब्ध हो पाते हैं।
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