नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली की DTC बसों में महिलाओं के लिए अनिवार्य किए गए पिंक सहेली कार्ड ने इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर काम का दबाव बढ़ा दिया है। एक ही मशीन से सामान्य यात्रियों के टिकट बनाने और महिलाओं के पिंक सहेली कार्ड टैप करने के कारण बसों में टिकटिंग प्रक्रिया धीमी होने की शिकायतें सामने आई हैं।
1 अक्टूबर से पिंक टिकट की जगह पिंक सहेली कार्ड से निशुल्क यात्रा की व्यवस्था लागू होने के बाद कंडक्टरों को एक ही मशीन पर दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है।
भीड़ के समय बढ़ रही मुश्किल
बसों में की गई पड़ताल के दौरान सामने आया कि भीड़ के समय कई महिलाएं एक साथ कार्ड टैप कराने के लिए कंडक्टर के पास पहुंचती हैं। वहीं, अन्य यात्रियों को भी टिकट लेना होता है। ऐसे में मशीन के अटकने या प्रक्रिया में देरी होने से यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है।
लक्ष्मी नगर से दिल्ली सचिवालय और मोरी गेट से बदरपुर रूट की बसों में भी इस तरह की परेशानी देखी गई।
यात्रियों ने की अलग कार्ड रीडर की मांग
महिला यात्रियों का कहना है कि पिंक सहेली कार्ड से यात्रा की सुविधा अच्छी है, लेकिन इसके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। यात्रियों ने बसों के दरवाजों पर मेट्रो की तर्ज पर अलग कार्ड रीडर लगाने की मांग की है, ताकि महिलाएं खुद कार्ड टैप कर सकें और कंडक्टर सामान्य टिकटिंग पर ध्यान दे सकें।
सुविधा के साथ व्यवस्था भी जरूरी
पिंक सहेली कार्ड का उद्देश्य महिलाओं की यात्रा को आसान बनाना है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में एक ही ETM पर निर्भरता के कारण बसों में देरी और भीड़ की समस्या सामने आ रही है।
अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली परिवहन विभाग बसों में अलग कार्ड रीडर लगाने की व्यवस्था करेगा, ताकि महिलाओं की मुफ्त यात्रा सुविधा और सामान्य यात्रियों की टिकटिंग दोनों बिना बाधा जारी रह सकें?
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