शारदीय नवरात्र 2026: कन्या पूजन में भूलकर भी न दें ये 3 चीजें, धार्मिक मान्यता में मानी जाती हैं अशुभ

धर्म-अध्यात्म

नई दिल्ली (Action Bharat) | शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के बाल स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। इस दौरान कन्याओं को भोजन कराने के साथ दक्षिणा और उपहार देने की भी परंपरा है।

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होगी। कन्या पूजन के दौरान बच्चियों को उपहार देते समय कुछ वस्तुओं से बचने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है।

कन्याओं को क्या उपहार दे सकते हैं?

कन्या पूजन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार बच्चियों को फल, मिठाई, पुस्तक, कॉपी-पेंसिल, रुमाल, चूड़ियां, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दी जा सकती हैं।

कई परिवार कन्याओं को लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री भी भेंट करते हैं। धार्मिक परंपरा में उपहार की कीमत से ज्यादा श्रद्धा और सम्मान के भाव को महत्वपूर्ण माना जाता है।

1. नुकीली चीजें

कन्या पूजन में बच्चियों को नुकीली या धारदार वस्तुएं उपहार में देने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से इन्हें शुभ नहीं माना जाता।

2. काले रंग की वस्तुएं

कन्या पूजन के दौरान काले रंग से जुड़ी वस्तुएं भेंट न करने की धार्मिक मान्यता है। काले रंग को कुछ परंपराओं में नकारात्मकता से जोड़ा जाता है। इसके स्थान पर लाल, गुलाबी या पीले रंग की वस्तुएं दी जा सकती हैं।

3. चमड़े से बनी वस्तुएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन के अवसर पर बच्चियों को चमड़े से बनी वस्तुएं उपहार में देने से बचना चाहिए। इसके बजाय कपड़े, पुस्तकें, स्टेशनरी या अन्य उपयोगी सामग्री दी जा सकती है।

कन्या पूजन में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, सम्मान और सेवा का भाव माना जाता है। इसलिए महंगे उपहार की बजाय बच्चियों की जरूरत और उपयोगिता को ध्यान में रखकर सरल एवं सम्मानजनक वस्तु देना बेहतर माना जाता है।

नोट: उपहार से जुड़े ये नियम धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में इनके नियम अलग हो सकते हैं।

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