नई दिल्ली (Action Bharat) | भारतीय सेना ने जवानों तक राशन की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने और सैन्य रसद व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ‘भारत राइस’ पहल शुरू की है। इसके तहत भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य सेना के सप्लाई डिपो तक निर्धारित गुणवत्ता वाला चावल सीधे पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर देशभर में मौजूद भंडारण व परिवहन संसाधनों का इस्तेमाल करना है।
राजनाथ सिंह और प्रल्हाद जोशी ने की पहल की शुरुआत
13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस पहल की शुरुआत की।
समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर सेना FCI के गोदामों, आधुनिक साइलो, परिवहन और रखरखाव से जुड़े उपकरणों तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों की सहायता ले सकेगी। इससे सैन्य रसद की योजना बनाने और आवश्यक सामान को समय पर पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज इलाकों तक पहुंचेगा चावल
नई व्यवस्था के तहत सेना के निर्धारित मानकों के अनुरूप चावल सीधे सैन्य सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा। इसमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में स्थित डिपो भी शामिल हैं।
अभी कई डिपो को स्थानीय FCI केंद्रों से राशन प्राप्त करने के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ती है। सीधे आपूर्ति की व्यवस्था से परिवहन और वितरण की प्रक्रिया आसान हो सकती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात जवानों तक राशन की उपलब्धता बनाए रखना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
10 और 30 किलो के बैग में होगी आपूर्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान चावल की आपूर्ति भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) के माध्यम से की जाएगी। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चावल की जांच भी की जाएगी।
चावल को 10 किलोग्राम और 30 किलोग्राम के बैग में उपलब्ध कराने की योजना है। पैकेजिंग इस तरह तैयार की जाएगी कि दुर्गम क्षेत्रों में सामान की ढुलाई, भंडारण और रखरखाव सुविधाजनक हो सके।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक का भी उल्लेख
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पहल को ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार खाद्यान्न सैनिकों के कल्याण और सेना की परिचालन तैयारियों में योगदान देगा।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में रसद व्यवस्था की अहमियत पर जोर दिया। हथियारों और तकनीक के अलावा समय पर राशन की आपूर्ति, भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क और मजबूत सप्लाई चेन भी सेना की तैयारी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक का भी उल्लेख है। रक्षा मंत्री के अनुसार, भविष्य में संघर्ष की स्थिति बनने और कार्रवाई शुरू होने के बीच बहुत कम समय मिल सकता है। ऐसे हालात में सेना के पास जरूरी सामान की उपलब्धता और उसे तेजी से पहुंचाने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
पांच साल तक प्रभावी रहेगा समझौता
सेना और FCI के बीच यह समझौता पांच साल तक प्रभावी रहेगा। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से इसकी अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल को अंतिम रूप देने के लिए सेना, FCI, NAFED और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच करीब 18 महीने तक समन्वय किया गया।
क्यों अहम है यह पहल?
‘भारत राइस’ पहल का महत्व केवल चावल की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इसका लक्ष्य सेना की खाद्य आपूर्ति को अधिक व्यवस्थित बनाना और जरूरत के समय दूरदराज के सैन्य डिपो तक राशन पहुंचाने की क्षमता को मजबूत करना है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव आपूर्ति व्यवस्था के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और समयबद्ध वितरण पर निर्भर करेगा।
#ActionBharat #IndianArmy #BharatRice #FCI #NAFED #OperationSindoor #DefenceNews #IndianDefence #RajnathSingh #भारतीयसेना #रक्षासमाचार #जयजवानजयकिसान
