पटना (Action Bharat) | बिहार में जमीन खरीदने और रजिस्ट्री कराने से पहले धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने के लिए अंचल अधिकारी (CO) से भौतिक सत्यापन कराने की सुविधा लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार, पिछले साढ़े तीन महीने में प्रदेशभर में 676 मामलों में जमीन का सत्यापन किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीदार को रजिस्ट्री से पहले जमीन की स्थिति, स्वामित्व और संभावित विवादों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है।
ई-निबंधन पोर्टल पर कर सकते हैं आवेदन
इस सुविधा के तहत जमीन खरीदने वाला व्यक्ति रजिस्ट्री से पहले बिहार के ई-निबंधन पोर्टल पर CO वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकता है। विभाग के मुताबिक, आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचल अधिकारी को 10 दिनों के भीतर जांच से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होती है।
इससे खरीदार को जमीन की खरीद का फैसला लेने से पहले उसकी स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। खासकर उन मामलों में यह व्यवस्था उपयोगी है, जहां जमीन के मालिकाना हक, पुराने लेन-देन या कानूनी विवाद को लेकर संदेह हो।
मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक 47 मामलों की जांच
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक सत्यापन मुजफ्फरपुर जिले में दर्ज किया गया। यहां कुल 47 मामलों में जमीन की जांच हुई।
जिलेवार प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- मुजफ्फरपुर: 47 मामले
- औरंगाबाद: 42 मामले
- दरभंगा: 40 मामले
- कटिहार: 26 मामले
- नालंदा: 24 मामले
- गया: 22 मामले
- पूर्णिया: 19 मामले
मुजफ्फरपुर में हुए 47 सत्यापनों में मुजफ्फरपुर कार्यालय के 29, पारू के 11, मोतीपुर के चार और कटरा के तीन मामले शामिल हैं।
औरंगाबाद जिले में 42 मामलों में जांच हुई, जिनमें औरंगाबाद कार्यालय के 35 और दाउदनगर के सात मामले थे। दरभंगा जिले में 40 मामलों में सत्यापन किया गया। इनमें बिरौल के 34 और कमतौल के छह मामले शामिल हैं।
सरकारी या विवादित जमीन की पहचान में मिल सकती है मदद
जमीन की खरीद-बिक्री में कई बार खरीदार को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनकी जानकारी रजिस्ट्री से पहले नहीं मिल पाती। उदाहरण के तौर पर, जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद, सरकारी भूमि पर दावा, पहले हो चुकी बिक्री या जमीन पर ऋण से संबंधित मामले सामने आ सकते हैं।
CO वेरिफिकेशन के दौरान जमीन का भौतिक निरीक्षण और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर ऐसी स्थितियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे खरीदार को संभावित जोखिमों के बारे में पहले से जानकारी मिल सकती है।
हालांकि, केवल CO वेरिफिकेशन को जमीन के निर्विवाद मालिकाना हक की अंतिम गारंटी नहीं मानना चाहिए। खरीदने से पहले संबंधित दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड, भार या ऋण संबंधी जानकारी और जरूरत पड़ने पर कानूनी जांच भी करानी चाहिए।
10 दिनों में मिलेगी सत्यापन से जुड़ी जानकारी
विभाग के अनुसार, आवेदन मिलने के बाद अंचल अधिकारी को 10 दिनों के भीतर पोर्टल पर सत्यापन से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होती है। इसमें जमीन के वास्तविक स्वामित्व, उसके सरकारी या निजी होने की स्थिति, पूर्व बिक्री और ऋण से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है।
यह समयसीमा खरीदारों को रजिस्ट्री से पहले जमीन की पड़ताल करने का अवसर देती है। इससे किसी संदिग्ध सौदे में जल्दबाजी करने के बजाय दस्तावेजों की जांच के बाद निर्णय लेना आसान हो सकता है।
11 जुलाई को शुरू हुई थी सुविधा
खबर के अनुसार, इस सुविधा की शुरुआत 11 जुलाई को हाजीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निबंधन विभाग के कार्यक्रम के दौरान की थी। इसके बाद खरीदारों के लिए ई-निबंधन पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्री से पहले जमीन सत्यापन का विकल्प उपलब्ध कराया गया।
साढ़े तीन महीने में 676 मामलों का सत्यापन इस व्यवस्था के इस्तेमाल को दर्शाता है। अब इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सत्यापन की प्रक्रिया कितनी समयबद्ध और सटीक रहती है तथा खरीदारों को उपलब्ध कराई गई जानकारी जमीन की वास्तविक स्थिति समझने में कितनी मदद करती है।
जमीन खरीदने वालों के लिए जरूरी सलाह
बिहार में जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को चाहिए कि वे रजिस्ट्री से पहले CO वेरिफिकेशन की सुविधा का लाभ उठाएं। साथ ही, जमीन के दस्तावेजों और मालिकाना हक की स्वतंत्र जांच भी कराएं। किसी भी सौदे में केवल विक्रेता के मौखिक दावे या उपलब्ध कराई गई फोटोकॉपी पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान करना अधिक सुरक्षित रहेगा।
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