9 साल बाद खोला गया जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर, बदहाली की तस्वीरों को लेकर सपा प्रमुख ने योगी सरकार पर उठाए सवाल
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) की स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। करीब नौ साल तक बंद रहने के बाद जेपीएनआईसी को बुधवार को खोले जाने के बाद वहां की स्थिति से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन्हीं को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा की नीतियों और सोच पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए भाजपा पर आधुनिकता और प्रगति के विरोध का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की “ठहरी हुई सोच” पर केवल काई जम सकती है या फिर जंग लग सकती है।
JPNIC की तस्वीरों को लेकर राजनीतिक विवाद
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में तैयार की गई प्रमुख परियोजनाओं में शामिल रहा है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद जब परिसर को खोला गया तो वहां की स्थिति की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गईं।
इसी मुद्दे को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को लेकर भाजपा पर सवाल उठते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी सरकार आधुनिकता और प्रगति से जुड़े प्रतीकों की उपेक्षा कर रही है।
हालांकि, अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप उनके बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों पर भाजपा या सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह अलग से महत्वपूर्ण होगा।
अखिलेश ने इतिहास और भविष्य का भी किया जिक्र
सपा प्रमुख ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा की विचारधारा और नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतिहास की पीढ़ियां भी भाजपा को माफ नहीं करेंगी और भविष्य की पीढ़ियां भी नहीं करेंगी। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को लेकर भी भाजपा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट के अंत में ‘भाजपा खत्म’ लिखकर अपना राजनीतिक विरोध जाहिर किया।
उनके इस बयान के बाद JPNIC का मुद्दा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ गया है।
क्या है JPNIC?
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) लखनऊ में स्थित एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिसर है, जिसे समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में विकसित किया गया था। इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के नाम पर रखा गया है।
परिसर में जयप्रकाश नारायण से जुड़े संग्रहालय और अन्य सुविधाओं की परिकल्पना की गई थी। परियोजना को लेकर शुरुआती दौर से ही इसके निर्माण, लागत और उपयोग को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है।
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान यह परियोजना उनकी सरकार की प्रमुख शहरी परियोजनाओं में गिनी जाती थी।
करीब नौ साल तक बंद रहा परिसर
JPNIC लंबे समय से बंद रहने के कारण राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ था। समाजवादी पार्टी लगातार आरोप लगाती रही है कि भाजपा सरकार ने पिछली सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को महत्व नहीं दिया।
अब करीब नौ साल बाद परिसर खोले जाने और वहां की मौजूदा स्थिति सामने आने के बाद यह विवाद फिर तेज हो गया है।
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकार की उपेक्षा के कारण परियोजना की हालत खराब हुई, जबकि सरकार की ओर से JPNIC के भविष्य के उपयोग और प्रबंधन को लेकर अलग दृष्टिकोण अपनाया गया है।
निजी कंपनियों को लीज पर देने की योजना पर भी विवाद
JPNIC को लेकर मौजूदा विवाद केवल परिसर की बदहाली तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने JPNIC को निजी कंपनियों को लीज पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार की ओर से इस तरह की व्यवस्था के पीछे परिसर का बेहतर उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित करने का तर्क दिया जा सकता है, जबकि विपक्ष इसे सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण की दिशा में कदम बता सकता है।
इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव की संभावना आगे भी बनी रह सकती है।
JPNIC पर राजनीति क्यों तेज हुई?
JPNIC को लेकर विवाद की जड़ केवल एक इमारत या परिसर की स्थिति नहीं है। यह परियोजना सीधे तौर पर अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़ी हुई है। इसलिए इसके रखरखाव, उपयोग और भविष्य को लेकर होने वाला हर फैसला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाता है।
समाजवादी पार्टी इसे अपनी सरकार की विकास परियोजना के रूप में देखती है, जबकि मौजूदा सरकार इसके संचालन और उपयोग को अपने तरीके से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में नौ साल बाद परिसर का खुलना और उसके बाद सामने आई तस्वीरों ने पुराने राजनीतिक विवाद को फिर से हवा दे दी है।
आगे बढ़ सकता है सियासी विवाद
JPNIC को लेकर अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सपा इसे भाजपा सरकार की कथित उपेक्षा से जोड़ रही है, वहीं सरकार के सामने परिसर के भविष्य, रखरखाव और उपयोग को लेकर अपने फैसले को उचित ठहराने की चुनौती होगी।
फिलहाल JPNIC को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे भविष्य में किस स्वरूप में संचालित किया जाएगा और निजी कंपनियों को लीज देने की योजना किस रूप में लागू होती है।
