नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगातार संपर्क बना हुआ है और दोनों पक्ष फरवरी में तय की गई रूपरेखा को आगे बढ़ाने तथा उसे अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वाणिज्य सचिव के बयान से ऐसे समय में उम्मीदें बढ़ी हैं, जब अमेरिका की ओर से भारत के निर्यात और रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर टैरिफ संबंधी मुद्दे चर्चा में हैं।
फरवरी में बनी थी व्यापार समझौते की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने फरवरी में प्रस्तावित व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी, लेकिन अमेरिका की ओर से नए टैरिफ और अन्य व्यापारिक मुद्दे सामने आने के कारण समझौते को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों देश फरवरी में बनी रूपरेखा के आधार पर समझौते को आगे बढ़ाने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत बंद नहीं हुई है, बल्कि नियमित स्तर पर संपर्क जारी है।
अमेरिका के टैरिफ पर भारत की नजर
भारत के निर्यात को लेकर अमेरिका में टैरिफ संबंधी कई मुद्दे सामने आए हैं। धारा 301 के तहत चल रही जांच के कारण भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
ऐसे में भारत के लिए व्यापार समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच कारोबार को लेकर कई मुद्दों पर स्पष्टता आ सकती है।
100 प्रतिशत तक टैरिफ की चर्चा से बढ़ी चिंता
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भी भारत और अमेरिका के बीच परिस्थितियां जटिल हुई हैं। अमेरिकी सीनेट में ऐसा विधेयक पारित हुआ है, जिसके तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। यही वजह है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के साथ-साथ ऊर्जा आयात और अमेरिकी टैरिफ नीति पर भी भारत की नजर बनी हुई है।
भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोत बढ़ाए
वाणिज्य सचिव के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता बढ़ाई है।
पहले भारत करीब 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। इससे किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
LNG आयात के स्रोत भी बढ़ाए
भारत ने केवल कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि LNG यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस के आयात के स्रोत भी बढ़ाए हैं।
पहले भारत छह देशों से LNG आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 15 देशों तक पहुंच गई है। इनमें अमेरिका भी भारत के लिए LNG का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है।
ट्रेड डील पर अब क्या होगा?
फिलहाल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। वाणिज्य सचिव के बयान से साफ है कि दोनों पक्ष समझौते की फरवरी वाली रूपरेखा को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क में हैं।
हालांकि, टैरिफ, रूस से तेल खरीद और अमेरिका की आगे की व्यापार नीति जैसे मुद्दे समझौते को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अब नजर इस बात पर है कि दोनों देश इन संवेदनशील मुद्दों पर किस तरह सहमति बनाते हैं और प्रस्तावित मेगा ट्रेड डील कब अंतिम रूप लेती है।
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