नई दिल्ली। सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। धार्मिक परंपरा में इस दिन नाग देवता की पूजा और स्मरण का विशेष महत्व माना जाता है।
मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। खास बात यह है कि पूजा के लिए वास्तविक नाग की आवश्यकता नहीं होती। घर पर चित्र या मिट्टी से बनाई गई नाग प्रतिमा के सामने विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
नाग पंचमी पर इन 12 नागों की होती है पूजा
धार्मिक परंपरा में नाग पंचमी के दिन 12 प्रमुख नागों का स्मरण और पूजन बताया गया है—
- अनंत
- वासुकी
- शेष
- पद्म
- कंबल
- कर्कोटक
- अश्वतर
- धृतराष्ट्र
- शंखपाल
- कालिया
- तक्षक
- पिंगल
इन नागों की पूजा चित्र के माध्यम से या मिट्टी से प्रतीकात्मक प्रतिमा बनाकर की जा सकती है।
घर पर कैसे करें नाग देवता की पूजा?
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ करके लकड़ी के पाटे पर नाग देवता का चित्र या मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद पूजा में निम्न सामग्री अर्पित कर सकते हैं—
- चंदन और अक्षत
- सुगंधित फूल
- इत्र
- धूप और दीप
- गुड़
- लावा
- मीठा दूध
इसके बाद नाग देवता को नमन करते हुए श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
असली नाग को दूध पिलाने से बचें
नाग पंचमी के मौके पर कई जगह सपेरों के पास रखे वास्तविक सांपों को दूध पिलाने की परंपरा देखने को मिलती है। हालांकि, सांपों को पकड़कर, बंद करके या उन्हें जबरन दूध पिलाना उचित नहीं है।
घर पर प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की पूजा करना या किसी मंदिर में जाकर नाग देवता के दर्शन करना बेहतर विकल्प है। जीव-जंतुओं को परेशान न करने का संदेश भी इस पर्व की भावना से जुड़ा है।
नाग पंचमी पर करें नाग देवता का स्मरण
नाग पंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक परंपरा में प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धा के साथ नाग देवता का स्मरण करें और सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखें।
NEWS FOR ACTION BHARAT
