चंडीगढ़। PGI चंडीगढ़ में करीब 20 लाख रुपये के इंजेक्शन चोरी का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने दवाओं और इंजेक्शन की निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला किया है। अब अस्पताल के सभी विभागों को दवाओं और इंजेक्शन का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम (HIS) में दर्ज करना होगा।
नई व्यवस्था के तहत यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई दवा या इंजेक्शन कब स्टोर से निकला, किस विभाग को भेजा गया और किस मरीज के इलाज में उसका इस्तेमाल हुआ।
हर दिन अपडेट करना होगा रिकॉर्ड
PGI प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि दवाओं और इंजेक्शन से संबंधित रिकॉर्ड HIS सॉफ्टवेयर में नियमित रूप से अपडेट किया जाए।
इसमें मुख्य रूप से—
- उपलब्ध स्टॉक
- स्टोर से जारी की गई दवाएं
- विभाग को प्राप्त दवाएं
- मरीजों को दी गई दवाएं
- इस्तेमाल की गई मात्रा
- बचा हुआ स्टॉक
जैसी जानकारियां दर्ज करनी होंगी।
स्टोर से मरीज तक होगी निगरानी
नई ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखना है। यानी किसी दवा या इंजेक्शन के अस्पताल में पहुंचने से लेकर मरीज को दिए जाने तक उसका रिकॉर्ड सिस्टम में उपलब्ध रहेगा।
यदि स्टॉक में कमी दिखाई देती है तो रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच करना आसान होगा कि संबंधित दवा या इंजेक्शन कहां इस्तेमाल हुआ।
चोरी और स्टॉक में गड़बड़ी पकड़ना होगा आसान
अस्पताल में महंगी दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज में होता है। ऐसे में रिकॉर्ड में अंतर आने पर उसकी पहचान करना महत्वपूर्ण है।
HIS में ऑनलाइन रिकॉर्ड होने से प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी दवा की खपत वास्तविक मरीजों के इलाज के अनुरूप है या नहीं।
इससे अनावश्यक खपत, रिकॉर्ड में अंतर और संभावित स्टॉक गड़बड़ी की पहचान पहले की तुलना में आसान हो सकती है।
गायनी विभाग में चोरी के बाद लिया गया फैसला
यह कदम PGI के गायनी विभाग में करीब 20 लाख रुपये के इंजेक्शन चोरी होने के मामले के बाद सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में स्टाफ की कथित मिलीभगत की बात भी सामने आई थी।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने महंगी दवाओं और इंजेक्शन के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है।
अब जिम्मेदारी भी होगी तय
ऑनलाइन रिकॉर्ड व्यवस्था का एक अहम पहलू यह है कि दवा के स्टॉक और उसके इस्तेमाल का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित रिकॉर्ड की जांच करना आसान हो सकता है।
हालांकि, केवल ऑनलाइन सिस्टम लागू करना ही पर्याप्त नहीं होगा। व्यवस्था प्रभावी बनाने के लिए रिकॉर्ड की नियमित जांच, स्टॉक का भौतिक सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी भी जरूरी होगी।
क्या बदलेगा?
पहले: दवाओं का रिकॉर्ड अलग-अलग स्तरों पर रखा जाता था।
अब: सभी विभागों को HIS में ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना होगा।
पहले: स्टॉक में अंतर की पहचान करने में समय लग सकता था।
अब: डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए स्टॉक और इस्तेमाल का मिलान करना आसान होगा।
पहले: दवा के इस्तेमाल की जानकारी अलग-अलग रिकॉर्ड में मिलती थी।
अब: स्टोर से मरीज तक की जानकारी एक ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करने की व्यवस्था होगी।
निष्कर्ष: करीब 20 लाख रुपये के इंजेक्शन चोरी के मामले के बाद PGI प्रशासन ने दवाओं की निगरानी को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह उसके नियमित इस्तेमाल, रिकॉर्ड की जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: चोरी और कथित मिलीभगत से जुड़े तथ्य संबंधित रिपोर्ट के आधार पर हैं। किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत संलिप्तता को अंतिम रूप से तभी माना जाना चाहिए जब जांच या सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि हो।
